रायपुर। विश्व अंगदान दिवस के अवसर पर शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय, रायपुर, छत्तीसगढ़ के रचना शारीर विभाग द्वारा अंगदान के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर यह संदेश भी दिया गया कि एक व्यक्ति का निस्वार्थ निर्णय मरणोपरांत कम से कम 8 लोगों को जीवनदान दे सकता है तथा अनेक लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार कर सकता है।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. प्रवीण कुमार जोशी की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम में रचना शारीर विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. मीनू श्रीवास्तव खरे उपस्थित रहीं। साथ ही विभाग के रीडर डॉ. सुशील द्विवेदी, डॉ. नम्रता तिवारी तथा व्याख्यातागण डॉ. दिलीप कुमार, डॉ. कुलदीप कुमार एवं डॉ. यास्मिन खान भी उपस्थित रहे। साथ ही रचना शारीर विभाग के सभी पीजी स्कॉलर्स ने भी कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना योगदान दिया।


कार्यक्रम में बीएमएस प्रथम वर्ष के छात्र-छात्राओं ने पोस्टर प्रेजेंटेशन, स्पीच एवं नाटक के माध्यम से अंगदान के प्रति जागरूकता फैलाई। विद्यार्थियों ने यह भी संदेश दिया कि अंगदान किसी धर्म, जाति या सामाजिक बंधन से परे मानवता की सबसे बड़ी सेवा है।
कार्यक्रम के दौरान अंगदान के महत्व, अंगदान से जुड़ी भ्रांतियों, डर एवं अंधविश्वासों को दूर करने की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने बताया कि मृत्यु के उपरांत (ब्रेन डेड स्थिति में) हृदय, किडनी, लिवर, फेफड़े और आंखें जैसे अंगों के दान से कई जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन दिया जा सकता है। साथ ही यह भी बताया गया कि अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO) की आधिकारिक वेबसाइट notto.mohfw.gov.in पर पंजीकरण कर कोई भी वयस्क नागरिक अंगदाता बन सकता है।
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं उपस्थितजनों को अंगदान के प्रति जागरूक करना तथा समाज में “अंगदान – जीवनदान” की भावना को प्रोत्साहित करना रहा। कार्यक्रम में उपस्थित सभी सदस्यों ने अंगदान के महत्व को समझते हुए इसके प्रति जागरूकता फैलाने और इस पुनीत कार्य में आगे आने का संकल्प लिया।
