रायपुर। दुनिया में तेजी से बढ़ने वाले कैंसर में लिवर कैंसर भी प्रमुख रूप से सामने आ रहा है। फैटी लिवर, हेपेटाइटिस बी और सी संक्रमण तथा अत्यधिक शराब के सेवन से लिवर को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। समय पर जांच और उपचार से बीमारी की गंभीर जटिलताओं से बचाव संभव है। यह जानकारी यशोदा हॉस्पिटल्स, हाईटेक सिटी, हैदराबाद के क्लिनिकल डायरेक्टर एवं वरिष्ठ सलाहकार मेडिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट और लिवर विशेषज्ञ डॉ. नवीन पोलावरपु ने रायपुर में आयोजित मीडिया सम्मेलन में दी।
डॉ. नवीन ने कहा कि लिवर की बीमारी कई बार लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षण के बढ़ती रहती है, इसलिए इसे ‘साइलेंट किलर’ भी कहा जाता है। पैरों में सूजन, पेट में पानी भरना या लिवर कैंसर जैसे लक्षण सामने आने तक बीमारी गंभीर अवस्था में पहुंच सकती है। ऐसे में नियमित रक्त जांच और आवश्यकता के अनुसार अल्ट्रासाउंड जैसे परीक्षण महत्वपूर्ण हैं।


उन्होंने बताया कि हेपेटाइटिस बी और सी वायरस कई लोगों में बिना स्पष्ट लक्षण के मौजूद रह सकते हैं और धीरे-धीरे लिवर को नुकसान पहुंचा सकते हैं। समय पर जांच, हेपेटाइटिस बी का टीकाकरण और उचित उपचार से गंभीर जटिलताओं का खतरा कम किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) वर्ष 2030 तक वायरल हेपेटाइटिस को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरे के रूप में समाप्त करने के लक्ष्य की दिशा में काम कर रहा है।
फैटी लिवर में जीवनशैली पर ध्यान जरूरी
डॉ. नवीन ने फैटी लिवर से बचाव के लिए कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज जैसी स्थितियों को नियंत्रण में रखने तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने अत्यधिक शराब के सेवन से बचने की सलाह देते हुए कहा कि इससे लिवर के साथ-साथ अग्न्याशय में सूजन यानी पैंक्रियाटाइटिस का खतरा भी बढ़ सकता है। गंभीर स्थिति में यह जानलेवा हो सकता है।
दो सप्ताह से अधिक लक्षण रहें तो कराएं जांच
उन्होंने अस्वास्थ्यकर खान-पान के कारण गैस्ट्रिक और पाचन संबंधी समस्याएं बढ़ने की बात कही। मल त्याग की आदत में बदलाव, मल में खून आना, पेट फूलना या अन्य पाचन संबंधी लक्षण दो सप्ताह से अधिक समय तक बने रहें तो चिकित्सकीय परामर्श लेने की सलाह दी।
उन्होंने बताया कि कोलोनोस्कोपी के जरिए आंतों में मौजूद पॉलीप्स की शुरुआती अवस्था में पहचान कर उन्हें हटाया जा सकता है। इससे कई मामलों में कोलोरेक्टल कैंसर की रोकथाम में मदद मिल सकती है। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों में कोलोनोस्कोपी के प्रति बढ़ी जागरूकता और जांच से कोलोरेक्टल कैंसर के मामलों में कमी लाने में मदद मिली है।
यशोदा हॉस्पिटल्स, हाईटेक सिटी, हैदराबाद के अनुसार अस्पताल में 2,000 बिस्तरों की क्षमता के साथ अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीक और विशेषज्ञ चिकित्सकों के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
