नई दिल्ली। हलाल प्रमाणन को लेकर हलाल नियंत्रण मंच ने देशव्यापी अभियान चलाने का ऐलान किया है। मंच ने हलाल प्रमाणन व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे अर्थव्यवस्था, धार्मिक आस्था और रोजगार से जुड़ा मुद्दा बताया। मंच की ओर से कहा गया कि 28 और 29 सितंबर को देशभर के राज्यों की राजधानियों में प्रदर्शन किए जाएंगे।
नई दिल्ली में आयोजित प्रेसवार्ता में मंच के प्रवक्ताओं के अलावा उद्योगपति एवं समाजसेवी हरिंदर सिक्का और सेवानिवृत्त न्यायाधीश पवन कुमार ने अपनी बात रखी। वक्ताओं ने दावा किया कि हलाल प्रमाणन पहले मुख्य रूप से मांस तक सीमित था, लेकिन अब इसका दायरा दवाइयों, कॉस्मेटिक्स, खाद्य पदार्थों और अन्य उत्पादों तक बढ़ गया है।
हरिंदर सिक्का ने आरोप लगाया कि हलाल प्रमाणन की व्यवस्था के चलते पशुवध कारोबार में हिंदू और सिख समुदाय के लोगों के रोजगार पर असर पड़ा। उन्होंने दावा किया कि रेलवे, एयरलाइंस और होटल सहित कई संस्थानों में हलाल मांस की खरीद को प्राथमिकता दी गई। मंच ने यह भी दावा किया कि केंद्र सरकार द्वारा APEDA से संबंधित हलाल प्रमाणन व्यवस्था में बदलाव किया गया है।
सेवानिवृत्त न्यायाधीश पवन कुमार ने आरोप लगाया कि कुछ मुस्लिम संस्थाएं हलाल प्रमाण-पत्र जारी करने के लिए शुल्क लेती हैं और इनसे प्राप्त धन के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए। हालांकि, प्रेसवार्ता में किए गए इन आरोपों के समर्थन में मंच की ओर से विस्तृत दस्तावेज या स्वतंत्र प्रमाण प्रस्तुत नहीं किए गए।
मंच ने हलाल प्रमाणन को लेकर सरकार से नियामकीय कार्रवाई की मांग करने की बात कही है। इसके साथ ही वर्ष के अंत तक देश के सभी राज्यों में ‘हलाल नियंत्रण मंच’ गठित करने, जागरूकता साहित्य वितरित करने तथा केंद्रीय मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों और स्थानीय निकायों के प्रमुखों से मुलाकात करने का कार्यक्रम घोषित किया गया है।
मंच के अनुसार, विभिन्न राज्यों में गोष्ठियों और जनसभाओं के जरिए भी इस मुद्दे पर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। साथ ही सिख और अनुसूचित जाति-जनजाति समाज के नेतृत्व से संपर्क कर हलाल प्रमाणन से जुड़े रोजगार और धार्मिक आस्था संबंधी मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।
