नई दिल्ली। साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन और व्यक्तित्व पर आधारित वृत्तचित्र ‘अमिट अटल: द अनफॉरगेटेबल अटल’ का भव्य प्रदर्शन गुरुवार को झंडेवालान स्थित विचार विनिमय न्यास सभागार में किया गया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले मुख्य अतिथि और प्रख्यात विचारक एवं वरिष्ठ राजनीतिज्ञ डॉ. मुरली मनोहर जोशी विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए।

इस अवसर पर सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि यह वृत्तचित्र अत्यंत प्रासंगिक और मर्मस्पर्शी है, जो अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन से जुड़ी कई ऐतिहासिक घटनाओं और संस्मरणों को जीवंत कर देता है। उन्होंने बताया कि मात्र 27 वर्ष की आयु में श्रद्धेय भाऊराव देवरस की प्रेरणा और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के मार्गदर्शन में अटल जी को पाञ्चजन्य का प्रथम संपादक बनाया गया था। उन्होंने लेखन, कविता और प्रभावी वक्तृत्व के माध्यम से देश पर अपनी अमिट छाप छोड़ी। उनकी प्रसिद्ध कविता ‘हिन्दू तन-मन, हिन्दू जीवन, रग-रग हिन्दू मेरा परिचय’ पहली बार पाञ्चजन्य में ही प्रकाशित हुई थी।
होसबाले ने जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर अटल जी के दृढ़ संकल्प का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पाञ्चजन्य के पहले संपादकीय का शीर्षक था, ‘जम्मू-कश्मीर से समझौता नहीं होने देंगे’ और अटल जी जीवन के अंतिम क्षण तक इस संकल्प पर अडिग रहे। उन्होंने कहा कि अटल जी पत्रकारिता को व्रत और तपस्या मानते थे तथा दैनिक समाचार को ‘सूचना’, साप्ताहिक को ‘प्रचार’ और मासिक को ‘विचार’ का माध्यम बताते थे।
वहीं, डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने अटल जी के साथ बिताए अपने लंबे राजनीतिक और वैचारिक सफर की यादें साझा कीं। उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी ने कभी अपने विचारों और सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। जनता पार्टी सरकार के दौर का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि राजनीतिक उथल-पुथल के बीच अटल जी दलीय संकीर्णताओं से ऊपर उठकर काम करने वाले नेता थे।
डॉ. जोशी ने बताया कि जब कुछ राजनीतिक समूहों ने संघ से संबंध तोड़ने का दबाव बनाया, तब अटल जी ने स्पष्ट कहा था, “हमारी नाल संघ से जुड़ी है, हम संघ से अलग कैसे हो सकते हैं?” उन्होंने यह भी कहा था कि वे ऐसी किसी सरकार को “चिमटे से भी छूना पसंद नहीं करेंगे” जो विचारों से समझौता करने पर मजबूर करे।
उन्होंने अपने शिक्षा मंत्री कार्यकाल का भी जिक्र किया और कहा कि जब स्कूलों में सरस्वती वंदना को लेकर विवाद खड़ा किया गया, तब प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने स्पष्ट कहा था, “सरस्वती वंदना हमारी सरकार में नहीं होगी तो फिर किस सरकार में होगी? यह अवश्य होनी चाहिए।” उन्होंने सरस्वती नदी के पुनर्स्थापना और उससे जुड़े शोध कार्यों के प्रति अटल जी की प्रतिबद्धता का भी उल्लेख किया।
कार्यक्रम में पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर सहित अनेक प्रबुद्धजन, लेखक और पत्रकार उपस्थित रहे। वृत्तचित्र ‘अमिट अटल’ में अटल बिहारी वाजपेयी के स्वयंसेवक, प्रचारक, कवि, पत्रकार, संपादक और प्रधानमंत्री तक के सफर के कई अनछुए पहलुओं को प्रामाणिकता के साथ प्रस्तुत किया गया है।
