लंदन। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने रविवार को लंदन में आयोजित ‘Celebration of Oneness’ कार्यक्रम में संघ की 100 वर्षों की यात्रा, हिंदू विचार, सेवा कार्य और आने वाली पीढ़ी की भूमिका पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि समाज और दुनिया को बेहतर बनाने के लिए उन तत्वों पर जोर देना चाहिए, जो लोगों को जोड़ते हैं, न कि उन बातों पर जो विभाजन पैदा करती हैं।
न्यूयॉर्क और टोरंटो में कार्यक्रमों के बाद लंदन पहुंचे डॉ. भागवत ने संघ की दीर्घकालिक यात्रा से जुड़े सवालों के जवाब दिए। संघ की अब तक की यात्रा में सबसे महत्वपूर्ण तत्व के सवाल पर उन्होंने ‘अपनापन’ को प्रमुख बताया। उन्होंने कहा कि सभी के प्रति शुद्ध और सात्त्विक प्रेम ही हिंदू का पारंपरिक स्वभाव है। व्यक्ति, समुदाय, समाज और पूरी मानवता के प्रति प्रेम की भावना समाज को जोड़ने का काम करती है।
‘हिन्दू विश्व को संतुलित दृष्टि दे सकते हैं’
हिंदू सभ्यता के वैश्विक योगदान पर डॉ. भागवत ने कहा कि अस्तित्व मूल रूप से एक है, भले ही वह विविध रूपों में दिखाई देता हो। उन्होंने विविधता को स्वीकार करने और उसका सम्मान करने पर जोर दिया। उनके अनुसार, हिंदू विचार इसी आधार पर विभिन्न मार्गों और परंपराओं को एक ही लक्ष्य की ओर जाने वाली अभिव्यक्तियों के रूप में देखता है।
उन्होंने ‘हिंदू’ को किसी एक धार्मिक आचरण या जीवनशैली तक सीमित मानने के बजाय एक ऐसी प्रकृति के रूप में परिभाषित किया, जो विविधताओं को स्वीकार और सम्मान करती है। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म की अलग-अलग परंपराएं अपनी विशिष्ट दर्शन-पद्धतियों और आचरण के साथ व्यापक हिंदू सभ्यतागत परिवेश में अस्तित्व में रह सकती हैं।

‘स्वयंसेवक जीवन के लगभग हर क्षेत्र में सक्रिय’
संघ की सेवा गतिविधियों का उल्लेख करते हुए सरसंघचालक ने कहा कि स्वयंसेवक मानव जीवन के लगभग हर क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने कहा कि जहां कोई कुछ नहीं कर रहा होता, वहां संघ सेवा कार्य कर रहा होता है। उन्होंने लद्दाख से कन्याकुमारी तक स्वयंसेवकों की सक्रियता का उल्लेख करते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेद रखने वाले लोग भी कई मौकों पर संघ के कार्य और स्वयंसेवकों के योगदान को स्वीकार करते हैं।
अगले 100 वर्षों के लिए संघ के लक्ष्य पर उन्होंने कहा कि संगठन को अपना कार्य लगातार आगे बढ़ाना है, लेकिन हिंदू समाज के संगठन का कार्य आने वाली कई पीढ़ियों तक लंबित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में संघ में कई पीढ़ियां साथ काम कर रही हैं और सातवीं पीढ़ी आने से पहले यह कार्य पूरा हो जाना चाहिए।
युवा पीढ़ी पर जताया भरोसा
भविष्य की पीढ़ी की भूमिका पर डॉ. भागवत ने युवाओं पर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी दुनिया को बेहतर बनाने की तीव्र इच्छा रखती है और छोटे-छोटे मतभेदों से ऊपर उठने के लिए तैयार है। उनके मुताबिक युवाओं को अनुभव और दृष्टि दी जानी चाहिए, लेकिन उनके ऊपर विचार थोपने के बजाय उन्हें अपना रास्ता खुद खोजने का अवसर देना चाहिए।
भारत के सामने आने वाली चुनौतियों में युवाओं की भूमिका पर उन्होंने सेवा को निःस्वार्थ भाव से करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सेवा किसी पर उपकार नहीं है, बल्कि यह स्वयं को ईश्वर के करीब ले जाने का अवसर है। जिन लोगों की सेवा की जाती है, वे सेवा का अवसर देकर स्वयं सेवक पर उपकार करते हैं।
ब्रिटिश हिन्दुओं की निष्ठा पर भी रखी बात
ब्रिटेन में रहने वाले हिंदुओं की निष्ठा से जुड़े सवाल पर डॉ. भागवत ने कहा कि ब्रिटेन और भारत के हितों के बीच कोई स्वाभाविक संघर्ष नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि ब्रिटिश हिंदू सच्चे हिंदू हैं, तो जिस भूमि में वे रहते हैं, वहां की सेवा और उसके प्रति निष्ठा उनके लिए महत्वपूर्ण होगी।
उन्होंने जन्मभूमि, पुण्यभूमि और कर्मभूमि के संदर्भ में कहा कि व्यक्ति को अपने मूल्यों को अपनी कर्मभूमि में जीना चाहिए और जिस भूमि पर वह रहता है, उसकी सेवा करनी चाहिए।
600 लोगों ने लिया कार्यक्रम में हिस्सा
कार्यक्रम का संचालन ब्रिटेन निवासी वेलनेस विशेषज्ञ ममता सुब्रह्मण्यम ने किया। हिन्दू स्वयंसेवक संघ, यूके (HSS UK) की ओर से आयोजित कार्यक्रम में करीब 600 लोग शामिल हुए, जिन्होंने 326 संगठनों का प्रतिनिधित्व किया। कार्यक्रम में हाउस ऑफ लॉर्ड्स के सदस्य, हाउस ऑफ कॉमन्स के सांसद, मेयर, काउंसिलर्स और ब्रिटेन में भारत के उच्चायुक्त पेरियासामी कुमारन तथा उप उच्चायुक्त कार्तिक पांडे समेत कई प्रमुख लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत नेपाल में बाढ़ के कारण जान गंवाने वाले लोगों और विस्थापित परिवारों की स्मृति में मौन रखकर हुई। इस दौरान बताया गया कि Sewa UK ने नेपाल में राहत कार्यों के लिए अंशदान के जरिए एक लाख पाउंड जुटाए हैं।
RSS के शताब्दी वर्ष के तहत डॉ. मोहन भागवत की यह यात्रा सेवा, सामाजिक समरसता और साझा मूल्यों पर केंद्रित सभ्यतागत संवाद का हिस्सा है। लंदन प्रवास के दौरान उन्होंने विभिन्न धर्मों के नेताओं, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों से भी मुलाकात की। उन्होंने स्वामीनारायण मंदिर, विल्सडन और खालसा जत्था ब्रिटिश आइल्स गुरुद्वारा समेत विभिन्न धार्मिक स्थलों का दौरा किया। कार्यक्रम में ब्रिटेन के हिंदू समाज के विभिन्न वर्गों और 11 भाषा-समुदायों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।
