न्यूयॉर्क। दुनिया में बढ़ते युद्ध, हिंसा, धार्मिक विभाजन और सामाजिक अविश्वास के बीच न्यूयॉर्क में आयोजित ‘एक विश्व : एक मानवता’ शिखर सम्मेलन में विश्व के धार्मिक नेताओं ने मानव गरिमा, शांति और आपसी सहयोग को मजबूत करने के लिए पांच प्रमुख संकल्प लिए। 29 अगस्त 2026 को आयोजित सम्मेलन में धार्मिक और सांस्कृतिक समुदायों के बीच संवाद बढ़ाने तथा संकट के समय एक-दूसरे के साथ खड़े होने का आह्वान किया गया।
सम्मेलन के ‘कार्य आह्वान’ में कहा गया कि दुनिया आज निर्णायक दौर से गुजर रही है। कई क्षेत्रों में युद्ध और हिंसा के कारण परिवार प्रभावित हो रहे हैं, जबकि धार्मिक और सामाजिक समुदायों के बीच भय तथा अविश्वास बढ़ रहा है। वक्ताओं ने कहा कि नई तकनीकें मानव संवाद, सत्य की समझ और शक्ति के इस्तेमाल के तरीके को तेजी से बदल रही हैं। ऐसे में किसी एक सरकार, संस्था या तकनीक के भरोसे मानवता की चुनौतियों का समाधान संभव नहीं है।
धार्मिक नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि हर मनुष्य गरिमा और सम्मान का अधिकारी है तथा कोई भी समुदाय दूसरे समुदाय से कम मानव नहीं है। उन्होंने कहा कि एकता के लिए एकरूपता जरूरी नहीं है और अलग-अलग विचारों के बावजूद सम्मान के साथ सह-अस्तित्व संभव है।
ये हैं पांच प्रमुख संकल्प
1. स्वयं से शुरुआत: धार्मिक समुदाय अपने शब्दों, शिक्षाओं, संस्थाओं और आचरण की समीक्षा करेंगे। धर्म के नाम पर घृणा, अपमान, अमानवीकरण या हिंसा को उचित ठहराने का विरोध किया जाएगा।
2. संकट में एक-दूसरे के साथ खड़े होना: किसी भी समुदाय को निशाना बनाए जाने या अमानवीय व्यवहार का सामना करने पर अन्य समुदाय उसके समर्थन में आवाज उठाएंगे, भले ही पीड़ित समुदाय उनका अपना न हो।
3. संकट से पहले संबंध बनाना: धार्मिक और सांस्कृतिक सीमाओं के पार विशेष रूप से युवाओं को जोड़ने के प्रयास किए जाएंगे। इसका उद्देश्य अलग-अलग समुदायों के लोगों को एक-दूसरे को समझने और पूर्वाग्रहों से बाहर निकलने का अवसर देना है।
4. मिलकर सेवा करना: भूख, बीमारी, विस्थापन, उत्पीड़न और उपेक्षा से प्रभावित लोगों की मदद के लिए विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक समुदाय मिलकर काम करेंगे। सम्मेलन में कहा गया कि सहयोग केवल बयानों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि साझा कार्यों में भी दिखाई देना चाहिए।
5. भविष्य के प्रति जिम्मेदारी: मानव गरिमा से जुड़े मुद्दों पर धार्मिक नेता अपने नैतिक प्रभाव का इस्तेमाल करेंगे। युद्ध और शांति, गरीबी, अवसर, पर्यावरण तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी उभरती तकनीकों से जुड़े फैसलों में मानव जीवन, सत्य, स्वतंत्रता और मानवीय संबंधों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया।
स्थानीय स्तर पर कार्रवाई का आह्वान
सम्मेलन में कहा गया कि वैश्विक घोषणाएं तभी सार्थक होंगी, जब उनका असर स्थानीय स्तर पर दिखाई दे। सभी नेताओं से कम से कम एक ठोस पहल शुरू करने को कहा गया। इसके तहत अलग-अलग समुदायों के लोगों को साथ लाने, किसी अन्य समुदाय के समर्थन में खड़े होने, युवाओं के लिए अंतर-धार्मिक संवाद का अवसर बनाने, मिलकर सेवा कार्य करने या लंबे समय से टाले जा रहे संवाद की शुरुआत करने का सुझाव दिया गया।
आयोजकों ने नेताओं से अपने चुने गए कार्य को स्थान, उद्देश्य और आगे बढ़ने की स्पष्ट योजना के साथ निर्धारित करने और बाद में उसकी प्रगति साझा करने का भी आह्वान किया।
सम्मेलन में यह भी स्वीकार किया गया कि धार्मिक नेता अकेले युद्ध समाप्त नहीं कर सकते या हर अन्याय को दूर नहीं कर सकते। हालांकि, उनके पास समुदायों को प्रभावित करने और एक-दूसरे तक पहुंच बनाने की महत्वपूर्ण क्षमता है।
कार्य आह्वान का समापन ‘एक विश्व, एक मानवता’ के संदेश के साथ हुआ। इसमें कहा गया कि लोग एक जैसे होने या हर मुद्दे पर सहमत होने के कारण नहीं, बल्कि साझा मानवीय गरिमा और परस्पर जुड़े भविष्य के कारण एक मानव परिवार का हिस्सा हैं।
