रायपुर। छत्तीसगढ़ की लोक कला, संस्कृति और मनोरंजन जगत में उल्लेखनीय योगदान देने वाले प्रख्यात कलाकार एवं तकनीकी विशेषज्ञ डॉ. आनंदसिंह चौहान को उनकी बहुमूल्य सेवाओं के लिए वर्ल्ड कल्चरल एंड एजुकेशनल ऑर्गेनाइजेशन द्वारा मानद डॉक्टरेट (Honorary Doctorate) की उपाधि से सम्मानित किया गया है। यह प्रतिष्ठित उपाधि उन्हें 20 अगस्त 2026 को प्रदान की गई।
डॉ. आनंदसिंह चौहान ने छत्तीसगढ़ी कला एवं संस्कृति को आगे बढ़ाने के साथ-साथ मीडिया और तकनीकी क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वर्ष 2004 से 2010 तक उन्होंने सुमन ऑडियो वीडियो, वीडियो वर्ल्ड, SG कैसेट और K.K. कैसेट जैसी प्रतिष्ठित ऑडियो-वीडियो कंपनियों के साथ मुख्य सहयोगी के रूप में कार्य किया।
छत्तीसगढ़ के पहले 24 घंटे संचालित होने वाले मनोरंजन चैनल ‘ग्रैंड यारा’ (Grand Yara) की स्थापना में उन्होंने टेक्निकल डायरेक्टर के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अलावा उन्होंने छत्तीसगढ़ में पहले डिजिटल प्रोडक्शन हाउस की स्थापना कर डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में नई पहल की। उनके इस योगदान के लिए छत्तीसगढ़ संस्कृति विभाग द्वारा उन्हें ‘कला रत्न पुरस्कार’ से भी सम्मानित किया जा चुका है।
डॉ. चौहान ने ‘चली आ मा बम्लेश्वरी’, ‘वरदान मा बम्लेश्वरी’, ‘गणेश के पापा’, ‘नाथु का दादा’, ‘झूमे दिया सारी बमलेशरी के मंदिर में’ और ‘माया के गांव माया के छांव’ जैसे चर्चित प्रोजेक्ट्स में निर्देशन, अभिनय, कैमरा एवं संपादन जैसे विभिन्न क्षेत्रों में अपनी बहुआयामी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है।
मानद डॉक्टरेट की यह उपाधि डॉ. आनंदसिंह चौहान की वर्षों की कला-साधना और छत्तीसगढ़ी संस्कृति के प्रति उनके समर्पण की महत्वपूर्ण पहचान मानी जा रही है। यह सम्मान केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की कला, लोक संस्कृति और मीडिया तकनीक के क्षेत्र में प्रदेश की प्रतिभा का भी सम्मान है।
दिल्ली में मिला यह सम्मान पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है और प्रदेश की समृद्ध कला एवं सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
