रायपुर। रायपुर जिले के तिल्दा तहसील स्थित 117 साल पुराने पेंड्रावन जलाशय के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। जलाशय के कैचमेंट क्षेत्र में अल्ट्राटेक सीमेंट कंपनी की लाइम स्टोन माइनिंग परियोजना को खनन की अनुमति दिए जाने के बाद किसानों में नाराजगी है। पेंड्रावन जलाशय बचाओ किसान संघर्ष समिति ने इस फैसले को किसान विरोधी बताते हुए खनन की अनुमति और पूरी परियोजना को तत्काल निरस्त करने की मांग की है।
समिति के अनुसार, ग्राम बंगोली में स्थित पेंड्रावन जलाशय क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण जल संरचना है। इससे 11 गांवों के करीब 3440 किसानों की 2440 हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई होती है। इसके अलावा जलाशय का उपयोग मछली पालन, निस्तारी और भूमिगत जल के पुनर्भरण के लिए भी किया जाता है। गर्मियों में आसपास के गांवों के लोगों को निस्तार के लिए पानी इसी जलाशय से मिलता है।
1722 एकड़ में प्रस्तावित है खनन परियोजना
किसान संघर्ष समिति के मुताबिक, जलाशय के कैचमेंट क्षेत्र में अल्ट्राटेक सीमेंट कंपनी की 1722 एकड़ में लाइम स्टोन खनन परियोजना प्रस्तावित है। इसके लिए जल संसाधन विभाग ने 23 जुलाई 2025 को एनओसी जारी की है। समिति का आरोप है कि खनन से जलाशय का अस्तित्व समाप्त हो सकता है और पूरे क्षेत्र में गंभीर जल संकट पैदा हो सकता है। खरोरा और तिल्दा क्षेत्र में पहले से ही भूजल की उपलब्धता कम है, ऐसे में खनन का प्रभाव किसानों और आम लोगों पर पड़ सकता है।
2017 में भी निरस्त हो चुकी है खनन की एनओसी
समिति ने बताया कि इससे पहले 30 जनवरी 2017 को भी जल संसाधन विभाग ने खनन के लिए एनओसी जारी की थी। उस समय विभाग के तत्कालीन कार्यपालन अभियंता ने अपनी विस्तृत टिप्पणी में खनन से जलाशय के अस्तित्व पर खतरा होने की आशंका जताई थी। टिप्पणी में कहा गया था कि पेंड्रावन एक हाई पर्सेंटेज डैम है। खनन से जलाशय का कैचमेंट क्षेत्र कम हो सकता है। साथ ही जलाशय का पानी रिसकर माइनिंग पिट में जा सकता है और ब्लास्टिंग से जलाशय की संरचना को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। किसानों के व्यापक आंदोलन के बाद तत्कालीन जल संसाधन मंत्री ने 20 मार्च 2017 को खनन की एनओसी निरस्त कर दी थी।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद दोबारा एनओसी जारी करने का मामला
समिति के अनुसार, एनओसी निरस्त होने के बाद अल्ट्राटेक कंपनी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। कंपनी ने दलील दी थी कि एनओसी निरस्त करने से पहले उसे अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया गया। 25 अप्रैल 2024 को हाईकोर्ट ने शासन के 20 मार्च 2017 के निरस्तीकरण आदेश को रद्द कर दिया था। अदालत ने शासन को निर्देश दिया था कि यदि विभाग उचित समझे तो जलाशय की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए दोबारा एनओसी जारी करने पर विचार कर सकता है। हालांकि, इस पर निर्णय लेने से पहले एक उच्चस्तरीय तकनीकी समिति गठित कर खनन के जलाशय पर पड़ने वाले प्रभावों की समीक्षा करने का निर्देश भी दिया गया था।
खनन की अनुमति निरस्त करने की मांग
पेंड्रावन जलाशय बचाओ किसान संघर्ष समिति ने आरोप लगाया है कि किसानों के विरोध और जलाशय की सुरक्षा से जुड़ी आपत्तियों को नजरअंदाज कर खनन की अनुमति दी गई है। समिति का कहना है कि जलाशय केवल सिंचाई का साधन नहीं, बल्कि 11 गांवों की आजीविका और जल जरूरतों का आधार है। समिति ने शासन से 23 जुलाई 2025 को जारी एनओसी और पूरी खनन परियोजना को तत्काल निरस्त करने की मांग की है।
