रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) पिछले दो महीनों से अध्यक्षविहीन है। पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष रीता शांडिल्य का कार्यकाल 8 सितंबर 2026 को समाप्त होने के बाद से आयोग में अध्यक्ष का पद रिक्त है। राज्य सरकार ने अब तक न तो स्थायी अध्यक्ष की नियुक्ति की है और न ही आयोग के किसी मौजूदा सदस्य को कार्यवाहक अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है। नियुक्ति में हो रही इस देरी का सीधा असर प्रदेश की भर्ती प्रक्रियाओं और हजारों युवाओं के भविष्य पर पड़ रहा है।
बेदाग छवि वाले चेहरे की तलाश या नामों पर सहमति का इंतजार?
राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में नियुक्ति में देरी को लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं। सूत्रों के मुताबिक, CGPSC पर पिछले कुछ समय से लगे भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं और कथित घोटालों के आरोपों के बाद सरकार आयोग की छवि बहाल करने के लिए किसी साफ-सुथरी छवि वाले व्यक्ति को जिम्मेदारी सौंपना चाहती है।
इस पद के लिए वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के नामों की चर्चा भी होती रही है। इनमें वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रेणु पिल्ले का नाम भी शामिल बताया जा रहा है। हालांकि, सरकार की ओर से अब तक किसी नाम पर आधिकारिक मुहर नहीं लगी है। माना जा रहा है कि नियुक्ति को लेकर उच्च स्तर पर विचार-विमर्श जारी है।
वहीं, कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए नियुक्ति में देरी को प्रशासनिक लापरवाही बताया है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार की निष्क्रियता के कारण नई भर्तियों और नियुक्तियों की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
608 अभ्यर्थियों के इंटरव्यू पर लगा ब्रेक
अध्यक्ष का पद रिक्त होने का सबसे बड़ा असर प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रक्रिया पर दिखाई दे रहा है। राज्य सेवा परीक्षा-2025 की मुख्य परीक्षा पास कर चुके 608 अभ्यर्थी साक्षात्कार और दस्तावेज सत्यापन का इंतजार कर रहे हैं। इनके इंटरव्यू 23 सितंबर से शुरू होने वाले थे, लेकिन अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं होने के कारण प्रक्रिया स्थगित करनी पड़ी।
इसके अलावा लोक निर्माण विभाग के 40 पदों और पुलिस विभाग में उप निरीक्षक, सूबेदार एवं प्लाटून कमांडर के 297 पदों पर भर्ती प्रक्रिया भी प्रभावित हुई है। इन परीक्षाओं को लेकर अभ्यर्थियों के बीच अनिश्चितता बनी हुई है।
26 नवंबर को जारी होने वाले नए विज्ञापन पर भी संशय
CGPSC की एक महत्वपूर्ण परंपरा के अनुसार, राज्य सेवा परीक्षा का वार्षिक विज्ञापन 26 नवंबर यानी संविधान दिवस के अवसर पर जारी किया जाता रहा है। ऐसे में अब अभ्यर्थियों की नजरें आगामी विज्ञापन पर टिकी हैं। यदि 26 नवंबर से पहले अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं होती है, तो राज्य सेवा परीक्षा-2026 का विज्ञापन भी निर्धारित समय पर जारी होने को लेकर संशय बढ़ सकता है।
54 विभागों में अधिकारियों की पदोन्नति भी प्रभावित
आयोग में अध्यक्ष की अनुपस्थिति का असर केवल प्रतियोगी परीक्षाओं तक सीमित नहीं है। छत्तीसगढ़ प्रदेश राजपत्रित अधिकारी संघ ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर इस स्थिति पर चिंता जताई है। संघ के मुताबिक, आयोग में अध्यक्ष नहीं होने से प्रदेश के 54 विभागों में कार्यरत सैकड़ों अधिकारियों की विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) से जुड़ी प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है।
तीन सदस्य संभाल रहे कामकाज, लेकिन फैसलों पर गतिरोध
फिलहाल आयोग के तीन सदस्य नियमित कामकाज संभाल रहे हैं, लेकिन अध्यक्ष का पद खाली होने से कई महत्वपूर्ण नीतिगत और प्रशासनिक निर्णय प्रभावित हो रहे हैं। अभ्यर्थियों के साथ ही अधिकारी संगठनों ने भी सरकार से जल्द नियुक्ति करने की मांग तेज कर दी है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या राज्य सरकार 26 नवंबर से पहले CGPSC को नया अध्यक्ष दे पाएगी या आयोग में नेतृत्व का यह संकट आगे भी जारी रहेगा। नियुक्ति में देरी का खामियाजा जहां हजारों अभ्यर्थियों को भुगतना पड़ रहा है, वहीं सरकारी विभागों की पदोन्नति प्रक्रिया भी इंतजार में है।
