रायपुर। स्वतंत्रता के बाद से लंबे समय तक हिन्दुत्व और RSS की विचारधारा के खिलाफ नकारात्मक नैरेटिव तैयार किया गया। उन्होंने गांधी हत्या के बाद महाराष्ट्र में ब्राह्मण समुदाय के खिलाफ हुई हिंसा का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौर की अनेक घटनाओं को पर्याप्त सार्वजनिक चर्चा नहीं मिली। गांधी हत्या के बाद गांधीवादियों और कांग्रेसियों ने पश्चिमी भारत में ब्राह्मणों का नरसंहार किया। लेकिन उस समय कवरेज नहीं मिली। ये बातें दिल्ली से आए वरिष्ठ पत्रकार और सुप्रसिद्ध लेखक – प्रखर श्रीवास्तव ने देवर्षि नारद जयंती पत्रकार सम्मान समारोह के आयोजन में कही। रायपुर विमतारा हॉल में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने ये भी कहा कि— कांग्रेस और विपक्ष शासित विभिन्न राज्यों से आई पुलिस पत्रकारों के खिलाफ कार्रवाई करती रही है। लेकिन कहीं कोई चर्चा नहीं होती। श्रीवास्तव ने कहा कि— राष्ट्रीय मीडिया में आज जितनी वैचारिक विविधता और बहस देखने को मिलती है, उतनी कांग्रेस शासनकाल में नहीं थी। उन्होंने दूरदर्शन समाचार (डीडी न्यूज) का उदाहरण देते हुए दावा किया कि वर्ष 2014 से पहले राजनीतिक विमर्श सीमित था और तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी कार्यक्रमों एवं साक्षात्कारों को प्रसारित नहीं किया गया।








मीडिया पर लगाए जाने वाले “गोदी मीडिया” के आरोपों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि 2014 के बाद सत्ता परिवर्तन के साथ उन समूहों की असहजता बढ़ी, जो पहले सत्ता और मीडिया के बीच बने विशेष संबंधों से लाभान्वित होते थे।जो कांग्रेस सरकार में लाभार्थी थे अब वो दूसरों को गोदी मीडिया कहते हैं। हां हम भारत माता की गोदी में बैठने वाले पत्रकार हैं।








डिजिटल मीडिया के दौर में फेक न्यूज सबसे बड़ी चुनौती : डॉ ओमप्रकाश व्यास
वहीं कार्यक्रम के मुख्य अतिथि IIT के कुलपति और निदेशक प्रो डॉ ओमप्रकाश व्यास ने कहा कि — डिजिटल मीडिया के तेजी से विस्तार के साथ समाचारों की प्रामाणिकता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करना पत्रकारिता के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन गया है। उन्होंने कहा कि पहले समाचार संस्थानों में संपादक की एक मजबूत संस्था हुआ करती थी, जो खबरों के सत्यापन और गुणवत्ता नियंत्रण की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाती थी। लेकिन अब संपादक संस्था की ज़रूरत कई गुना बढ़ गई है। ताकि समाज तक सही समाचार पहुंचे। ओमप्रकाश व्यास ने जोर देकर कहा कि डिजिटल युग में मीडिया संस्थानों, पत्रकारों और पाठकों सभी को सूचना के प्रति अधिक सजग और जिम्मेदार होने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विश्वसनीय पत्रकारिता की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है और इसके लिए तथ्य आधारित तथा उत्तरदायी पत्रकारिता को बढ़ावा देना समय की मांग है।








कार्यक्रम के संयोजक और मुख्यमंत्री के सलाहकार आर. कृष्णादास ने कहा कि— हम विगत कई वर्षों से भारतीय मूल्यों को समाज तक ले जाने के लिए ये आयोजन करते हैं। देवर्षि नारद जयंती आयोजन समिति तीन शीर्ष पुरस्कार प्रतिष्ठित पत्रकारों को देती है। कार्यक्रम के दौरान — प्रशांत शर्मा को देवर्षि नारद पुरस्कार, आकांक्षा तिवारी को बबन प्रसाद मिश्र पुरस्कार और रूपेश यादव को रमेश नैयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया।










इस दौरान राजधानी के पत्रकार, साहित्यकार, समाजसेवी सहित विविध क्षेत्रों के सैकड़ों लोग उपस्थित रहे। अतिथियों का परिचय प्रफुल्ल पारे ने दिया। कार्यक्रम का संचालन प्रियंका कौशल और आभार प्रदर्शन कृष्णमुरारी त्रिपाठी अटल ने किया।
