भिलाई। राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (NCLT) की कटक पीठ ने स्पर्श मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल प्राइवेट लिमिटेड, भिलाई से जुड़े कथित उत्पीड़न, कुप्रबंधन और वित्तीय अनियमितताओं के मामले में अहम फैसला सुनाया है। 13 जुलाई 2026 को पारित आदेश में अधिकरण ने अल्पसंख्यक शेयरधारक अजय सोमानी और प्रदीप पाल की याचिका स्वीकार करते हुए कंपनी के प्रबंधन में हस्तक्षेप किया है।
यह याचिका कंपनी अधिनियम, 2013 की धाराओं 210(2), 213, 221, 241 और 242 के तहत दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि बहुसंख्यक शेयरधारकों और प्रबंधन ने कंपनी के संचालन में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं कीं, कंपनी की निधियों का दुरुपयोग किया तथा अल्पसंख्यक शेयरधारकों के अधिकारों का हनन किया।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अभिनव कार्डेकर और उनकी विधि फर्म AKP Law ने दलील दी कि कंपनी के मामलों का संचालन कंपनी अधिनियम और कॉर्पोरेट गवर्नेंस के सिद्धांतों के विपरीत किया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) के तहत बिलिंग और नकद वसूली में गंभीर अनियमितताएं हुईं, जिसके चलते अस्पताल के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई हुई और उसे योजना से डी-एम्पैनल भी किया गया।
सुनवाई के बाद NCLT ने माना कि कंपनी के प्रबंधन में गंभीर कुप्रबंधन और अल्पसंख्यक शेयरधारकों का उत्पीड़न हुआ है। अधिकरण ने अस्पताल से जुड़ी वित्तीय अनियमितताओं, अवैध नकद लेन-देन और आयुष्मान भारत योजना से संबंधित कार्रवाई को भी अपने निर्णय में महत्वपूर्ण आधार माना।
NCLT के प्रमुख आदेश
- कंपनी अधिनियम की धारा 241 एवं 242 के तहत दायर याचिका स्वीकार की गई।
- कंपनी में उत्पीड़न और कुप्रबंधन पाए जाने की टिप्पणी दर्ज की गई।
- अस्पताल और कंपनी के संचालन के लिए NCLT की प्रधान पीठ, नई दिल्ली के पूर्व कार्यवाहक अध्यक्ष न्यायमूर्ति दीपक योगी को स्वतंत्र प्रशासक (Administrator) नियुक्त किया गया।
- कंपनी के वित्तीय लेन-देन, अभिलेखों और खातों की विस्तृत जांच कराने के निर्देश दिए गए।
- कंपनी को सभी वित्तीय दस्तावेज और रिकॉर्ड प्रशासक को उपलब्ध कराने तथा जांच में पूरा सहयोग करने का आदेश दिया गया।
- अल्पसंख्यक शेयरधारक अजय सोमानी और प्रदीप पाल को पुनः कंपनी के निदेशक पद पर बहाल किया गया।
- उत्पीड़न और कुप्रबंधन की अवधि में लिए गए विभिन्न कॉर्पोरेट निर्णयों को प्रशासक की निगरानी और समीक्षा के अधीन रखा गया।
NCLT ने अपने आदेश में कहा कि कंपनी अधिनियम की धाराएं 241 और 242 ऐसे मामलों में व्यापक अधिकार प्रदान करती हैं, जहां कंपनी का संचालन कंपनी या अल्पसंख्यक शेयरधारकों के हितों के प्रतिकूल पाया जाता है। ऐसे मामलों में अधिकरण कंपनी के हितों की रक्षा और पारदर्शी कॉर्पोरेट प्रशासन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक आदेश पारित कर सकता है।
फैसले के बाद अधिवक्ता अभिनव कार्डेकर ने कहा कि यह निर्णय कंपनी अधिनियम के तहत अल्पसंख्यक शेयरधारकों को मिले वैधानिक संरक्षण की महत्वपूर्ण पुष्टि है और इससे कॉर्पोरेट प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही तथा विधि के शासन के सिद्धांत और मजबूत होंगे।
