रायपुर। राष्ट्र सेविका समिति की प्रतिनिधि सभा ने देश में जनसंख्या असंतुलन को गंभीर और संवेदनशील विषय बताते हुए इस पर व्यापक राष्ट्रीय स्तर पर विचार और ठोस नीति बनाने की आवश्यकता जताई है। समिति ने केंद्र और राज्य सरकारों से सभी नागरिकों के लिए समान राष्ट्रीय जनसंख्या नीति लागू करने तथा समान नागरिक संहिता (UCC) को पूरे देश में प्रभावी करने की मांग की है।
प्रतिनिधि सभा में पारित प्रस्ताव में कहा गया कि भारत की जनसंख्या संरचना में हो रहे बदलावों पर पुनर्विचार की जरूरत है। समिति ने प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि विभिन्न समुदायों की जनसंख्या हिस्सेदारी में समय के साथ परिवर्तन देखने को मिला है। इसके सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय प्रभावों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
समिति ने अवैध घुसपैठ, मतांतरण और जनसांख्यिकीय परिवर्तन से जुड़े मुद्दों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में घुसपैठ रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था की जाए। साथ ही अवैध रूप से देश में रह रहे विदेशियों की पहचान कर उनके विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की गई।
प्रस्ताव में समाज से भी परिवार संस्था को मजबूत करने, उचित समय पर विवाह, संतानोत्पत्ति और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का आह्वान किया गया। समिति ने कहा कि समाज में शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और आर्थिक विकास को बढ़ावा देकर जागरूक एवं सशक्त समाज का निर्माण किया जाना चाहिए।
राष्ट्र सेविका समिति ने केंद्र और राज्य सरकारों से जनसंख्या असंतुलन से जुड़े सभी कारणों का अध्ययन कर आवश्यक कानूनी और नीतिगत कदम उठाने का आग्रह किया। साथ ही कहा कि समान नागरिक संहिता लागू होने से राष्ट्रीय एकरूपता और सामाजिक समरसता को मजबूती मिलेगी।
