रायपुर। मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में बच्चों की लगातार हो रही मौतों के विरोध में रायपुर में आदिवासी कांग्रेस ने कैंडल मार्च निकालकर न्याय सत्याग्रह किया। प्रदर्शन के दौरान पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने, मामले के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने और आदिवासी इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर करने की मांग उठाई गई।
बता दें कि आंदोलन का आयोजन अखिल भारतीय आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रांत भूरिया एवं छत्तीसगढ़ आदिवासी कांग्रेस के अध्यक्ष जनक ध्रुव के निर्देश पर किया गया। जिला आदिवासी कांग्रेस अध्यक्ष दीपेश कृपाल के नेतृत्व में हुए इस आंदोलन में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और आदिवासी कांग्रेस के पदाधिकारी शामिल हुए।
प्रदर्शनकारियों ने प्रत्येक पीड़ित परिवार को एक-एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग की। साथ ही आदिवासी बहुल क्षेत्रों में स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छ पेयजल और समय पर चिकित्सा सुविधा की व्यवस्था मजबूत करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।
छत्तीसगढ़ आदिवासी कांग्रेस के संगठन महासचिव कुलदीप ध्रुव ने कहा कि बालाघाट में मासूम आदिवासी बच्चों की मौत बेहद पीड़ादायक और चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि सरकार को पीड़ित परिवारों के साथ खड़े होकर उन्हें तत्काल न्याय और आर्थिक सहायता उपलब्ध करानी चाहिए। उन्होंने घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग की।
जिला आदिवासी कांग्रेस अध्यक्ष दीपेश कृपाल ने कहा कि बच्चों की मौत का मामला केवल एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छ पेयजल और समय पर चिकित्सा सुविधा की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल बालाघाट के पीड़ित परिवारों तक सीमित नहीं है, बल्कि आदिवासी समाज के जीवन, अधिकार और सम्मान से जुड़ा विषय है। आदिवासी कांग्रेस पीड़ित परिवारों को न्याय मिलने तक अपनी आवाज उठाती रहेगी।
कैंडल मार्च और न्याय सत्याग्रह में आदिवासी कांग्रेस के जिला एवं ब्लॉक स्तर के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में कांग्रेसजन शामिल हुए। आंदोलनकारियों ने पीड़ित परिवारों को न्याय, दोषियों पर कार्रवाई और आदिवासी क्षेत्रों की स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत करने की मांग को प्रमुखता से उठाया।
