नई दिल्ली। विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के केंद्रीय संयुक्त महामंत्री डॉ. सुरेंद्र जैन ने सड़कों पर नमाज पढ़ने को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक सड़कों पर नमाज अदा करना केवल संविधान और न्यायपालिका के निर्देशों के खिलाफ नहीं, बल्कि मानवता और इस्लाम की भावना के भी विपरीत है।
डॉ. जैन ने कहा कि विभिन्न उच्च न्यायालयों ने सार्वजनिक स्थानों और सड़कों पर नमाज पढ़ने पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने दावा किया कि सर्वोच्च न्यायालय ने भी इस विषय में सख्त संकेत दिए हैं। ऐसे में सड़कों पर नमाज पढ़ने की जिद न्यायपालिका की अवमानना के समान है।
उन्होंने कहा कि यह केवल कुछ मिनटों का मामला नहीं होता, बल्कि इससे आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि दिल्ली के रेलवे स्टेशनों पर पटरियों पर नमाज पढ़े जाने से ट्रेनों का संचालन प्रभावित होता था, वहीं गुरुग्राम में हाईवे पर लंबे ट्रैफिक जाम की स्थिति बन जाती थी। इससे स्कूल बसों, मरीजों को ले जा रही एंबुलेंस और आम यात्रियों को कठिनाई होती थी।
वीएचपी नेता ने यह भी कहा कि कई इस्लामिक देशों में भी सड़कों पर नमाज पढ़ने की अनुमति नहीं है और इस्लामिक शिक्षाओं में भी सार्वजनिक रास्तों को बाधित करने से बचने की बात कही गई है।
डॉ. जैन ने आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर सड़क पर नमाज पढ़ना धार्मिक आवश्यकता से अधिक शक्ति प्रदर्शन का माध्यम बन गया है। उन्होंने कहा कि गुरुग्राम में पहले जिन स्थानों पर सड़क पर नमाज होती थी, वहां आसपास की मस्जिदें खाली रहती थीं। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह केवल जगह की कमी का मुद्दा नहीं है।
उन्होंने सभी राज्य सरकारों से अपील की कि सार्वजनिक सड़कों पर नमाज पढ़ने पर सख्ती से रोक लगाई जाए और कानून तथा न्यायपालिका के निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही धार्मिक नेताओं से भी समाज को कानून का पालन करने के लिए प्रेरित करने की अपील की।
