भुवनेश्वर। भुवनेश्वर स्थित रेलवे ऑडिटोरियम में स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती स्मृति न्यास द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘वेदांत केशरी स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती: कृति एवं व्यक्तित्व’ का विमोचन किया गया। समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि धर्म और राष्ट्र के लिए कार्य करने वाले महापुरुषों की हत्या से उनके विचारों और कार्यों को रोका नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या के बाद भी उनके आदर्शों से प्रेरित होकर अनेक लोग समाज और राष्ट्र सेवा के कार्य में आगे आएंगे।


होसबाले ने कहा कि भारत में धर्म और समाज की रक्षा के लिए बलिदान की गौरवशाली परंपरा रही है। गुरु तेग बहादुर, स्वामी श्रद्धानंद और स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती जैसे महापुरुषों ने अपने जीवन का बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि केरल में वामपंथी हिंसा और कई राज्यों में नक्सली हमलों जैसी घटनाएं राष्ट्र सेवा के कार्यों को रोक नहीं सकतीं, बल्कि ऐसे हालात समाज में नई प्रेरणा पैदा करते हैं।
उन्होंने स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के जीवन को धर्म रक्षा, सामाजिक समरसता, वनवासी समाज के उत्थान, गौ संरक्षण और सेवा के लिए समर्पित बताया। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक केवल जीवनी नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को राष्ट्र निर्माण और सांस्कृतिक चेतना के लिए प्रेरित करने वाला महत्वपूर्ण दस्तावेज है। गुरु पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर उन्होंने लोगों से ऐसे महापुरुषों के आदर्शों पर चलने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती का त्याग, संघर्ष और जनजातीय समाज के उत्थान के लिए किया गया कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा। उन्होंने कहा कि चकापाड़ा और जलेशपट्टा आश्रमों के माध्यम से स्वामी जी ने वनवासी बालिकाओं की शिक्षा, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए उल्लेखनीय कार्य किए।
मुख्यमंत्री ने बताया कि स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की जन्म शताब्दी वर्ष समारोह की शुरुआत 21 अगस्त से होगी। इस दौरान ओडिशा के विभिन्न गांवों और देश के विश्वविद्यालयों में सेमिनार एवं कार्यशालाओं का आयोजन कर उनके विचारों का प्रसार किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने वर्ष 2008 में जन्माष्टमी की रात हुई स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या का उल्लेख करते हुए कहा कि न्यायमूर्ति नायडू आयोग से संबंधित फाइलों के गायब होने के मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी गई है। उन्होंने कहा कि जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के दिखाए मार्ग पर चलना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने कहा कि प्रकाशित पुस्तक स्वामी जी के तप, संघर्ष और समाज सेवा का महत्वपूर्ण दस्तावेज है। उन्होंने स्वामी जी को आध्यात्मिक संत होने के साथ-साथ ग्रामीण विकास और जनकल्याण के कार्यों से जुड़ा व्यक्तित्व बताया।
समारोह में स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती स्मृति न्यास के अध्यक्ष स्वामी जीवन मुक्तानंद पुरी, लेखक बिपिन बिहारी नंद और बांच्छानिधि पंडा सहित बड़ी संख्या में संत-महात्मा, सामाजिक कार्यकर्ता और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
