रायपुर। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान (ICAR–NIBSM), रायपुर का 14वां स्थापना दिवस समारोह बुधवार को संस्थान परिसर में आयोजित किया गया। समारोह में वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, किसानों, विद्यार्थियों, अधिकारियों और कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम में जीनोमिक विज्ञान, नवाचार और किसान-केंद्रित अनुसंधान को कृषि के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।
समारोह के मुख्य अतिथि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के पूर्व उप महानिदेशक (फसल विज्ञान) डॉ. टी. आर. शर्मा रहे। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरिश चंदेल, एमिटी विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़ के कुलपति प्रो. पीयूष कांत पांडेय और मैट्स विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. के. पी. यादव विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता ICAR–NIBSM के निदेशक डॉ. पी. के. राय ने की। संस्थान के पूर्व संयुक्त निदेशक एवं कार्यवाहक निदेशक डॉ. जगदीश कुमार भी विशेष रूप से मौजूद रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत ICAR गीत और दीप प्रज्वलन से हुई। संयुक्त निदेशक डॉ. अनिल दीक्षित ने स्वागत उद्बोधन में संस्थान की वैज्ञानिक यात्रा और जैविक स्ट्रेस प्रबंधन के क्षेत्र में इसकी बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। इसके बाद निदेशक डॉ. पी. के. राय ने संस्थान की प्रगति, प्रमुख वैज्ञानिक उपलब्धियों और विभिन्न गतिविधियों का प्रस्तुतिकरण किया। उन्होंने कीट, रोग, खरपतवार और अन्य जैविक स्ट्रेस से निपटने के लिए बहुविषयक अनुसंधान, नवाचार और किसान-केंद्रित तकनीकी विकास को मजबूत करने की आवश्यकता बताई।
जीनोमिक विज्ञान और जीन खोज पर व्याख्यान
मुख्य अतिथि डॉ. टी. आर. शर्मा ने स्थापना दिवस व्याख्यान में “Genomic Science and Gene Discovery” विषय पर विस्तार से विचार रखे। उन्होंने जीनोमिक विज्ञान एवं जीन खोज के विकास की यात्रा बताते हुए चावल में ब्लास्ट रोग के संदर्भ में Pi54 जीन की खोज और उसके वैज्ञानिक उपयोग पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि आधुनिक जीनोमिक और आणविक तकनीकों ने रोग प्रतिरोधी फसलों के विकास, उत्पादकता बढ़ाने और टिकाऊ कृषि के लिए नई संभावनाएं खोली हैं। उन्होंने कृषि अनुसंधान को किसानों और खेतों की वास्तविक समस्याओं से जोड़ने तथा उच्च उत्पादकता एवं जलवायु-सहिष्णु कृषि के लिए आधुनिक जीनोमिक तकनीकों के प्रभावी उपयोग पर जोर दिया।
वैज्ञानिक प्रकाशनों का विमोचन
स्थापना दिवस समारोह में संस्थान द्वारा तैयार विभिन्न वैज्ञानिक प्रकाशनों का विमोचन भी किया गया। इनमें प्राकृतिक खेती, आक्रामक कीट एवं रोग तथा विभिन्न व्यावहारिक मैनुअल शामिल रहे। इन प्रकाशनों को किसानों, विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और अन्य कृषि हितधारकों तक वैज्ञानिक एवं तकनीकी जानकारी पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया गया।
उत्कृष्ट वैज्ञानिकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों का सम्मान
समारोह में संस्थान के वैज्ञानिकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों की उत्कृष्ट उपलब्धियों को सम्मानित किया गया। श्रेष्ठ वैज्ञानिक पुरस्कार डॉ. पी. मोवेंथन को प्रदान किया गया। वहीं श्रेष्ठ शोध-पत्र पुरस्कार डॉ. एस. के. शर्मा एवं उनकी टीम को उत्कृष्ट शोध योगदान के लिए मिला।
श्रेष्ठ कार्यकर्ता पुरस्कार श्री जाकिर हुसैन खिलजी को प्रदान किया गया। विद्यार्थियों में श्रेष्ठ स्नातकोत्तर (PG) विद्यार्थी पुरस्कार श्री सौरभ तथा श्रेष्ठ स्नातक (UG) विद्यार्थी पुरस्कार सुश्री श्रेया को दिया गया।
अतिथियों ने पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं को बधाई देते हुए कहा कि ऐसे सम्मान संस्थान में शोध गुणवत्ता, नवाचार, अनुशासन, निष्ठा और उत्कृष्टता की कार्य-संस्कृति को मजबूत करते हैं। विद्यार्थी पुरस्कार युवा प्रतिभाओं को बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
किसान–वैज्ञानिक संवाद में समस्याओं पर हुई चर्चा
स्थापना दिवस के तहत किसान–वैज्ञानिक संवाद का भी आयोजन किया गया। इसमें किसानों ने अपनी फसलों और कृषि से जुड़ी समस्याएं वैज्ञानिकों के सामने रखीं। वैज्ञानिकों ने कीट एवं रोग प्रबंधन, जैविक स्ट्रेस तथा पर्यावरण-अनुकूल कृषि तकनीकों से संबंधित व्यावहारिक समाधान और वैज्ञानिक सुझाव दिए।
इस अवसर पर सब्जी फसलों में कीटों के जैविक नियंत्रण के लिए किसानों को ट्राइकोग्रामा कार्ड वितरित किए गए। संस्थान ने इसे रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने और जैविक एवं बायोरैशनल कीट प्रबंधन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
कार्यक्रम का उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान को किसानों की वास्तविक जरूरतों से जोड़ना और जैविक स्ट्रेस प्रबंधन की प्रभावी तकनीकों को खेतों तक पहुंचाना रहा।
कार्यक्रम में संस्थान के वैज्ञानिकों, तकनीकी एवं प्रशासनिक अधिकारियों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों और किसानों की सक्रिय सहभागिता रही। कार्यक्रम का समन्वय संयुक्त निदेशक डॉ. अनिल दीक्षित ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन डॉ. प्रियंका मीना ने किया।
14वें स्थापना दिवस समारोह ने ICAR–NIBSM की वैज्ञानिक उपलब्धियों और अब तक की यात्रा को रेखांकित करते हुए जीनोमिक विज्ञान, नवाचार, जैविक एवं बायोरैशनल तकनीकों और किसान-केंद्रित अनुसंधान के माध्यम से टिकाऊ, उत्पादक और जलवायु-सहिष्णु कृषि को बढ़ावा देने की संस्थान की प्रतिबद्धता को दोहराया।
