अंबिकापुर। नेताजी बंग समाज कल्याण समिति द्वारा गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर की जयंती के अवसर पर मधुर मिलन, भगवानपुर में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत गुरुदेव के छायाचित्र पर दीप प्रज्वलन और पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। इसके बाद अतिथियों का पुष्पगुच्छ एवं बैच लगाकर स्वागत किया गया।


कार्यक्रम की मुख्य अतिथि महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने गुरुदेव की कविताओं के अंश मूल बांग्ला भाषा में प्रस्तुत किए। उन्होंने टैगोर के साहित्य, रचनाओं और बंगाली समाज की सांस्कृतिक परंपराओं पर प्रकाश डालते हुए समाज द्वारा संस्कृति संरक्षण के प्रयासों की सराहना की।


विशिष्ट अतिथि चिंतामणि महाराज ने बांग्ला भाषा में सभी को गुरुदेव जयंती की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने टैगोर के जीवन, राष्ट्रगान की रचना, नोबेल पुरस्कार, गीतांजलि और अन्य साहित्यिक कृतियों पर अपने विचार साझा किए। साथ ही सनातन परंपरा में बंगाली समाज की भूमिका की प्रशंसा की।
समिति के अध्यक्ष दिलीप धर ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में बंगाली समाज की भाषा, साहित्य, कला और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर के आदर्श और विचार आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
इस दौरान कुलदीप सिंह कथुर ने शांतिनिकेतन में अध्ययन के अनुभव साझा किए, जबकि दिलीप कुमार विश्वास ने टैगोर के बचपन, परिवार, नोबेल पुरस्कार और राष्ट्रगान से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। गोसाई ने शिक्षा और सामाजिक एकता के क्षेत्र में टैगोर के विचारों को अपनाने की बात कही। वहीं शिल्पा पांडे ने महिला शिक्षा पर टैगोर के विचारों को रेखांकित किया। नूतन विश्वास ने कहा कि रविंद्र संगीत को हर घर तक पहुंचाया जाना चाहिए।
कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने विशेष आकर्षण बटोरा। हिमांगी त्रिपाठी, भानु प्रकाश मुखर्जी, जय किशन विश्वास, मोनालिका सोनी, सीमा खानवलकर, शिल्पी, अनुकूल समद्दार, सीमा अधिकारी, संचित रानी धर, इशिता पाल, आतिशी मुखर्जी और पावी हालदार ने रविंद्र संगीत एवं गीतांजलि की कविताओं की प्रस्तुति दी।
वहीं प्रगति विश्वास, प्रतीक विश्वास, खुशी सरकार, पूनम हालदार, अंकित विश्वास, बबली मजूमदार और निधिवी समूह ने सामूहिक एवं एकल नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों का मन मोह लिया।
कार्यक्रम का संचालन सुनीता दास और लिली बसुराय ने किया। अंत में अतिथियों और कलाकारों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में समाज के पदाधिकारी, सदस्य एवं बड़ी संख्या में महिला-पुरुष और बच्चे उपस्थित रहे।
