रायपुर। छत्तीसगढ़ में अतिथि शिक्षकों की जारी हड़ताल के बीच राज्य सरकार ने अब कड़ा रुख अपना लिया है। छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होने का हवाला देते हुए लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि हड़ताल पर बैठे सभी अतिथि शिक्षक 27 जुलाई 2026 तक अपनी-अपनी शालाओं में वापस लौटकर अध्यापन कार्य शुरू करें। निर्धारित समय-सीमा तक कार्य पर वापस नहीं आने वाले अतिथि शिक्षकों की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी जाएंगी।
लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा आज 23 जुलाई 2026 को जारी पत्र में कहा गया है कि राज्य की शासकीय शालाओं में अध्यापन व्यवस्था के तहत कार्यरत अतिथि शिक्षक पिछले कुछ दिनों से हड़ताल पर हैं। इसके कारण नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से ही स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित हो रही है, जो छात्र-छात्राओं के हित में नहीं है।
शाला प्रबंध समिति को दिए गए निर्देश
डीपीआई ने अपने आदेश में कहा है कि अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति पूर्व में जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार शाला प्रबंध समिति के माध्यम से की गई थी। ऐसे में संबंधित शाला प्रबंध समितियां सभी हड़ताली अतिथि शिक्षकों को 27 जुलाई 2026 तक विद्यालय में उपस्थित होकर अध्यापन कार्य प्रारंभ करने के लिए निर्देशित करें।
आदेश में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि यदि निर्धारित तिथि तक कोई अतिथि शिक्षक कार्य पर वापस नहीं लौटता है, तो 24 जून 2019 को जारी दिशा-निर्देशों की कंडिका 7.3 के तहत उसकी अध्यापन व्यवस्था तत्काल समाप्त कर दी जाएगी। यह निर्देश प्रभारी संचालक, लोक शिक्षण छत्तीसगढ़ की ओर से जारी किया गया है।
देखें आदेश

23 दिनों से जारी है आंदोलन
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ के अतिथि शिक्षक पिछले 23 दिनों से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर दुर्ग जिले में आंदोलन कर रहे हैं। आंदोलनकारी शिक्षक संविलियन, सेवा सुरक्षा, समान कार्य के लिए समान वेतन तथा मानदेय में वृद्धि की मांग कर रहे हैं।
बुधवार को दुर्ग पुलिस धरना स्थल पहुंची थी और प्रदर्शन समाप्त करने की चेतावनी दी थी। इसके बाद आंदोलनकारी शिक्षकों ने स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के निवास का घेराव कर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया।
शिक्षकों का आरोप—बातचीत की बजाय दबाव बना रही सरकार
अतिथि शिक्षक संघ का कहना है कि वे पिछले 23 दिनों से शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे हैं और सरकार से बातचीत के माध्यम से समाधान चाहते हैं। उनका आरोप है कि उनकी मांगों पर निर्णय लेने के बजाय प्रशासन आंदोलन समाप्त कराने का दबाव बना रहा है।
संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि प्रदेश के कई अतिथि शिक्षक पिछले 11 वर्षों से दूर-दराज और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के शासकीय विद्यालयों में सेवाएं दे रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें नियमित कर्मचारियों की तरह न तो सेवा सुरक्षा मिल रही है और न ही समान वेतन।
शिक्षकों ने स्पष्ट किया है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर लिखित एवं ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। हालांकि सरकार और अतिथि शिक्षक संघ के बीच बातचीत की संभावना अभी भी बनी हुई है
