रायपुर। राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत छत्तीसगढ़ को फाइलेरिया मुक्त बनाने के उद्देश्य से सामूहिक दवा सेवन (एमडीए) अभियान की शुरुआत 10 फरवरी 2026 से की जाएगी। अभियान की तैयारियों को लेकर 20 जनवरी 2026 को स्वास्थ्य भवन, अटल नगर रायपुर में दो दिवसीय राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें 7 जिलों के जिला मलेरिया अधिकारी, खंड चिकित्सा अधिकारी, वीबीडी सलाहकार और टेक्निकल सुपरवाइजर शामिल हुए।

कार्यशाला में संयुक्त निदेशक एनसीवीबीडीसी, भारत सरकार डॉ. रिंकू शर्मा वर्चुअल माध्यम से जुड़े और प्रतिभागियों को मार्गदर्शन दिया। इस अवसर पर संचालक महामारी नियंत्रण डॉ. सुरेन्द्र पामभोई, क्षेत्रीय संचालक डॉ. संदीप जगदंड, भारत सरकार के सीएमओ डॉ. सरीफ, राज्य कार्यक्रम अधिकारी डॉ. जीतेन्द्र कुमार, डब्ल्यूएचओ, डब्ल्यूजेसीएफ, पीसीआई और ग्लोबल हेल्थ स्ट्रेटेजी सहित अन्य संस्थाओं के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
प्रशिक्षण में बताया गया कि 10 फरवरी से राज्य के 18 जिलों के 65 विकासखंडों में एमडीए अभियान चलाया जाएगा। इनमें 15 जिलों—रायपुर, गरियाबंद, बलौदाबाजार, महासमुंद, बिलासपुर, मुंगेली, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, जांजगीर-चांपा, सक्ती, सारंगढ़-बिलाईगढ़, सरगुजा, सूरजपुर, जशपुर, बालोद और रायगढ़—में आईवरमेक्टिन, डीईसी और एल्बेंडाजोल (आईडीए) की तीन दवाएं दी जाएंगी। वहीं बस्तर (जगदलपुर), राजनांदगांव और खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में डीईसी और एल्बेंडाजोल (डीए) के माध्यम से दवा सेवन कराया जाएगा।
इस अभियान के तहत लगभग 1 करोड़ 58 लाख से अधिक लोगों को फाइलेरिया से बचाव के लिए बूथों और घर-घर जाकर दवाएं खिलाई जाएंगी। प्रशिक्षण सत्रों में माइक्रोप्लानिंग, रिपोर्टिंग सिस्टम, दवा एवं लॉजिस्टिक प्रबंधन, वित्तीय व्यवस्था, जनजागरूकता, मीडिया समन्वय और अंतरविभागीय सहयोग जैसे अहम विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि एमडीए अभियान के दौरान स्वास्थ्य कर्मी लाभार्थियों को अपने सामने ही दवा सेवन कराएं। यदि कोई व्यक्ति छूट जाता है तो पुनः घर जाकर उसे दवाएं खिलाई जाएंगी।
कार्यक्रम का उद्देश्य है— “स्वस्थ छत्तीसगढ़ की पहचान, फाइलेरिया मुक्त अभियान।”
