रायपुर। प्रदेश में चिकित्सकों के लिए स्वीकृत प्रमुख प्रशासनिक पदों पर प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति को लेकर चिकित्सक समुदाय में नाराजगी है। प्रदेश के चिकित्सकों और विभिन्न चिकित्सक संगठनों ने इस फैसले का पुरजोर विरोध करते हुए इसे चिकित्सकों के अधिकारों और करियर के अवसरों को सीमित करने वाला कदम बताया है।
चिकित्सक संगठनों का कहना है कि आयुष्मान नोडल अधिकारी और SHIFW डायरेक्टर जैसे महत्वपूर्ण पद चिकित्सकों के लिए निर्धारित हैं। ऐसे पदों पर प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति से योग्य और अनुभवी चिकित्सकों के लिए नेतृत्व की भूमिका में आगे बढ़ने के अवसर प्रभावित होंगे। उनका मानना है कि इन पदों पर चिकित्सकों को उनकी योग्यता, अनुभव और कार्यक्षमता के आधार पर जिम्मेदारी दी जानी चाहिए।
चिकित्सकों के मुताबिक, स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े प्रशासनिक पदों पर चिकित्सा क्षेत्र का अनुभव बेहद महत्वपूर्ण है। चिकित्सक अस्पतालों की कार्यप्रणाली, स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी चुनौतियों और मरीजों के साथ ही स्वास्थ्यकर्मियों की समस्याओं को बेहतर ढंग से समझते हैं। ऐसे में उनके नेतृत्व से स्वास्थ्य संबंधी योजनाओं और व्यवस्थाओं का संचालन अधिक व्यावहारिक और संवेदनशील तरीके से किया जा सकता है।
डायरेक्टर हेल्थ और मेडिकल एजुकेशन के ढांचे में बदलाव पर भी चिंता
चिकित्सक समुदाय ने डायरेक्टर हेल्थ जैसे महत्वपूर्ण पदों की व्यवस्था में पहले किए गए बदलावों और डायरेक्टर मेडिकल एजुकेशन के ऊपर कमिश्नर मेडिकल एजुकेशन का पद स्थापित किए जाने पर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि यदि स्वास्थ्य विभाग में प्रशासनिक पदों पर चिकित्सकों की भूमिका लगातार सीमित होती रही, तो भविष्य में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO), मेडिकल कॉलेजों के डीन और अस्पताल अधीक्षक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी चिकित्सकों के अवसर प्रभावित हो सकते हैं।
चिकित्सक समुदाय ने स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े प्रमुख प्रशासनिक पदों पर नियुक्तियों में चिकित्सा अनुभव, योग्यता और विशेषज्ञता को प्राथमिकता देने की जरूरत बताई है। उनका जोर है कि स्वास्थ्य व्यवस्था के संचालन में चिकित्सकों की भागीदारी और नेतृत्व की भूमिका को बनाए रखा जाना चाहिए।
