नई दिल्ली। लोकतंत्र सेनानी संघ और प्रहरी के संयुक्त तत्वावधान में दिल्ली के एनडीएमसी सभा कक्ष में ‘लोकतंत्र विजय दिवस’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। देश के 13 राज्यों से आए लगभग 600 सेनानियों और प्रहरियों ने इसमें भाग लिया।
इंद्रेश कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि लोकतंत्र की बहाली के संघर्ष की गाथा भावी पीढ़ी तक पहुंचाना सेनानियों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि संघर्ष, परिश्रम और त्याग ही आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनेगा और लोकतंत्र की रक्षा का संदेश देगा।

राष्ट्रीय अध्यक्ष कैलाश सोनी ने कहा कि आपातकाल के खिलाफ संघर्ष करने वाली पीढ़ी देश को दिशा देने वाली रही है। राज्य सरकारों द्वारा किए जा रहे सम्मान के पीछे उद्देश्य यही है कि नई पीढ़ी इससे प्रेरणा ले सके।
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सच्चिदानंद उपासने ने कहा कि मार्च 1977 में मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग कर तानाशाही को समाप्त कर लोकतंत्र की बहाली की थी। उन्होंने कहा कि यह उन सेनानियों के त्याग और तपस्या का परिणाम था, जिन्होंने 21 माह तक यातनाएं झेलीं।
सम्मेलन में प्रस्ताव पारित कर केंद्र और राज्य सरकारों से 21 मार्च को ‘लोकतंत्र विजय दिवस’ घोषित करने की मांग की गई। साथ ही जिला मुख्यालयों में लोकनायक जयप्रकाश नारायण की प्रतिमा सहित ‘लोकतंत्र विजय स्तंभ’ स्थापित करने और हर वर्ष इस दिन कार्यक्रम आयोजित करने का सुझाव दिया गया।
कार्यक्रम के दौरान संगठन के चुनाव भी संपन्न हुए, जिसमें कैलाश सोनी को पुनः राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया। छत्तीसगढ़ के सच्चिदानंद उपासने को तीन वर्ष के लिए राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया, साथ ही उन्हें प्रहरी का राष्ट्रीय अध्यक्ष भी नियुक्त किया गया।
सम्मेलन में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि आगामी वर्ष ‘लोकतंत्र विजय दिवस’ उड़ीसा में आयोजित किया जाएगा। छत्तीसगढ़ से 30 प्रतिनिधियों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया।
