रायपुर। पार्किंसंस रोग के उपचार में डीप ब्रेन स्टिमुलेशन (DBS) तकनीक को प्रभावी और विश्वसनीय विकल्प माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, DBS न केवल रोग के विभिन्न लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद करता है, बल्कि मरीजों की जीवन गुणवत्ता, स्वतंत्रता और आत्मसम्मान को भी बेहतर बनाता है।
विशेषज्ञों ने बताया कि DBS की सबसे बड़ी विशेषता इसकी द्विपक्षीय क्षमता (Bilateral Capability) है। यह मस्तिष्क के दोनों हिस्सों का उपचार कर सकता है, जिससे उन मरीजों को विशेष लाभ मिलता है जिनके शरीर के दोनों तरफ के अंग प्रभावित हैं। इसके अलावा यह तकनीक प्रोग्राम करने योग्य (Adjustable) है, यानी मरीज के लक्षणों में समय के साथ होने वाले बदलाव के अनुसार डॉक्टर उपचार में सूक्ष्म संशोधन कर सकते हैं।
DBS की एक अन्य महत्वपूर्ण विशेषता इसकी प्रतिदर्तिता (Reversibility) है। आवश्यकता पड़ने पर इसके प्रभावों को कम या बंद किया जा सकता है, जबकि एमआर-गाइडेड फोकस्ड अल्ट्रासाउंड (MRgFUS) से किए गए बदलाव स्थायी होते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार DBS कंपन (Tremor), शरीर की अकड़न, गति में धीमापन और मोटर उतार-चढ़ाव जैसे कई लक्षणों को नियंत्रित करने में सक्षम है, जबकि MRgFUS मुख्य रूप से केवल कंपन को लक्ष्य बनाता है.
MRgFUS की सीमाएं
विशेषज्ञों ने बताया कि MRgFUS के कुछ महत्वपूर्ण सीमित पक्ष भी हैं। एक बार इस प्रक्रिया से मस्तिष्क में घाव बनने के बाद उसे वापस नहीं किया जा सकता। इसके अलावा यह तकनीक आमतौर पर उन्हीं मरीजों के लिए उपयुक्त मानी जाती है जो सर्जरी के लिए उपयुक्त उम्मीदवार नहीं होते। DBS के मुकाबले MRgFUS अपेक्षाकृत नई तकनीक है, जबकि DBS की सुरक्षा और प्रभावशीलता को लेकर कई दशकों का शोध और अनुभव उपलब्ध है।
जागरूकता की कमी बड़ी चुनौती
डॉ. रूपम बोरगोहेन और उनकी टीम—डॉ. रुणी मृदुता, डॉ. राजेश अतुगोलू तथा डॉ. ऋति कोला—ने पाया कि अनेक मरीजों और कई स्वास्थ्यकर्मियों को भी DBS की संभावनाओं और लाभों की पर्याप्त जानकारी नहीं है। उनका मानना है कि मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए आम जनता और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं दोनों के बीच जागरूकता बढ़ाना बेहद आवश्यक है।
डॉ. बोरगोहेन ने कहा कि DBS पार्किंसंस रोगियों के जीवन में बड़ा सकारात्मक बदलाव ला सकता है। यह केवल लक्षणों से राहत ही नहीं देता, बल्कि मरीजों को अधिक स्वतंत्र और बेहतर जीवन जीने में भी मदद करता है। उन्होंने कहा कि बीमारी और उपलब्ध उपचार विकल्पों के बारे में जागरूकता फैलाना समय की आवश्यकता है। सही दवा, सर्जरी या अन्य उपयुक्त उपचार के माध्यम से पार्किंसंस रोग से पीड़ित व्यक्ति अधिक संतोषजनक और गुणवत्तापूर्ण जीवन जी सकते हैं।
