रायपुर। तेलंगाना से बिजली की करीब 3600 करोड़ रुपये की बकाया राशि वसूलने की छत्तीसगढ़ सरकार और पावर कंपनी की कोशिशों को अब तक सफलता नहीं मिली है। मामले में अब छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग में सुनवाई होगी। आयोग ने तेलंगाना सरकार को अपना पक्ष रखने के लिए तलब किया है। मामले की सुनवाई 10 सितंबर को निर्धारित की गई है।
छत्तीसगढ़ पावर कंपनी ने तेलंगाना से करीब 36 सौ करोड़ रुपये की बिजली बिल की बकाया राशि वसूलने के लिए नोटिस जारी किया था। हालांकि, तेलंगाना की ओर से राशि का भुगतान नहीं किया गया। बकाया राशि की वसूली के लिए सरकारी स्तर पर भी पहल की गई थी। बताया जा रहा कि छत्तीसगढ़ पावर कंपनी के चेयरमैन सुबोध कुमार सिंह ने इस संबंध में तेलंगाना सरकार को पत्र लिखा था, लेकिन इसका कोई जवाब नहीं आया।
दरअसल, छत्तीसगढ़ नियामक आयोग में राज्य पावर कंपनी की याचिका पर सुनवाई की प्रक्रिया चल रही है। पहले दोनों राज्यों के बीच आपसी चर्चा के जरिए बिजली बिल भुगतान के विवाद को सुलझाने की उम्मीद थी। इसी वजह से सुनवाई की तारीख दो बार आगे बढ़ाई गई। हालांकि, इस दिशा में कोई प्रगति नहीं होने के बाद आयोग अब मामले की सुनवाई करने जा रहा है। 10 सितंबर को होने वाली सुनवाई में तेलंगाना सरकार को अपना पक्ष रखना होगा।
बताया जा रहा कि तेलंगाना को बिजली आपूर्ति के भुगतान को लेकर पिछले छह साल से विवाद चल रहा है। रमन सिंह सरकार के कार्यकाल में तेलंगाना के साथ बिजली बेचने को लेकर समझौता हुआ था। इसके तहत छत्तीसगढ़ बिजली बोर्ड अलग-अलग समय में एक हजार मेगावाट तक बिजली की आपूर्ति करता रहा। यह बिजली कोरबा के मड़वा प्लांट से दी जाती थी। शुरुआत में भुगतान को लेकर स्थिति सामान्य रही, लेकिन बाद में तेलंगाना बिजली बोर्ड ने बिजली बिल का भुगतान बंद कर दिया। इसके बाद बकाया बिजली बिल की राशि बढ़कर करीब 36 सौ करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
पिछली सरकार के दौरान भी भुगतान के लिए तेलंगाना पर दबाव बनाया गया था। इस दौरान छत्तीसगढ़ राज्य पावर कंपनी और तेलंगाना के अधिकारियों के बीच बैठक भी हुई थी। तेलंगाना करीब 21 सौ करोड़ रुपये की राशि को बकाया मान रहा है। बकाया भुगतान के लिए किस्तों में राशि देने पर तेलंगाना सरकार ने सहमति भी दी थी, लेकिन भुगतान नहीं हुआ। इसके बाद छत्तीसगढ़ पावर कंपनी ने बिजली आपर्ति बंद कर दी।
इधर, तेलंगाना में सरकार बदलने के बाद कांग्रेस की रेवंत रेड्डी सरकार ने पूर्ववर्ती केसीआर सरकार पर छत्तीसगढ़ से बिजली खरीद में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि बिना टेंडर के छत्तीसगढ़ से अधिक दर पर बिजली खरीदी गई, जिससे तेलंगाना बिजली बोर्ड को 13 सौ करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। तेलंगाना सरकार इस मामले की न्यायिक जांच करा रही है। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में एक सदस्यीय आयोग गठित किया गया है। राज्य पावर कंपनी की याचिका पर सुनवाई शुरू होने के बाद बिजली भुगतान विवाद का बातचीत के जरिए समाधान होने की उम्मीद भी खत्म हो गई है।
