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प्रधानमंत्री श्री मोदी के विकास के मॉडल पर हो रहा मध्यप्रदेश में क्रियान्वयन : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

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ShivApr 3, 20254 min read

भोपाल।   मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र…

प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के बेहतर प्रदायगी हेतु विशेषज्ञ चिकित्सक व चिकित्सा अधिकारियों की नियुक्ति

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ShivApr 3, 20252 min read

रायपुर।   मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर राज्य में स्वास्थ्य…

70 बच्चों की तबीयत बिगड़ी, छिपकली गिरी मध्याह्न भोजन बच्चों को परोसा, अस्पताल में चल रहा ईलाज

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ShivApr 3, 20251 min read

बलरामपुर। सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को दिए जाने वाले…

फार्महाउस में रेड, अवैध शराब तस्करी के बड़े रैकेट का हुआ पर्दाफाश

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ShivApr 3, 20253 min read

डोंगरगढ़।  डोंगरगढ़ में लाखों रुपए की अवैध शराब की खेप…

April 3, 2025

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स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन, हाईकोर्ट ने सिटी मजिस्ट्रेट पर लगाया जुर्माना

बिलासपुर। हाईकोर्ट ने स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करने के मामले में कोरबा के सिटी मजिस्ट्रेट गौतम सिंह पर 25 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। प्रतिबंधात्मक धारा में जेल भेजने के सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को हाईकोर्ट ने स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का हनन माना है।

दरअसल, कोरबा के बालको में कार्यरत कर्मचारी लक्ष्मण साकेत क्वार्टर नंबर ईडब्ल्यूएस फेस-2 एमपी नगर थाना सिविल लाइंस रामपुर में रहता है। लक्ष्मण साकेत का उसकी पत्नी के साथ घरेलू विवाद चल रहा है। पत्नी ने पति के खिलाफ सिविल लाइन थाने में एक शिकायत दर्ज कराई। इस पर पुलिस ने महिला के पति पर सीआरपीसी की धारा 107, 16 के तहत कार्रवाई करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट के कोर्ट में पेश किया। जब अधिवक्ता ने साकेत की रिहाई को लेकर बेल बांड की राशि पेश की तो शाम पांच बजे सिटी मजिस्ट्रेट ने साल्वेंट श्योरिटी की शर्त लगा दी। इधर शाम हो जाने के कारण साकेत के अधिवक्ता साल्वेंट श्योरिटी पेश नहीं कर सके। इस आधार पर सिटी मजिस्ट्रेट ने साकेत लक्ष्मण को जेल भेज दिया।

सिटी मजिस्ट्रेट के फैसले को उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी। मामले में छत्तीसगढ़ सरकार के मुख्य सचिव, सिटी मजिस्ट्रेट कोरबा, गृह विभाग के सचिव, पुलिस अधीक्षक कोरबा, सिविल लाइन के थाना प्रभारी और थाने में मामले की शिकायत करने वाली महिला संध्या साकेत को पक्षकार बनाया गया। याचिका में तर्क दिया गया कि सिटी मजिस्ट्रेट को साल्वेंट श्योरिटी मांगने का अधिकार नहीं है। मामले में मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा व न्यायाधीश बीडी गुरु की पीठ में सुनवाई हुई। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद सिटी मजिस्ट्रेट के फैसले को अवैध करार दिया और याचिकाकर्ता के मौलिक अधिकार का हनन बताया। मामले में कोर्ट ने कोरबा पुलिस, अपर कलेक्टर पर 25 हजार रुपए का जुर्माना लगाया और इसका भुगतान 30 दिन के भीतर करने कहा है।