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तहसीलदारों को पदोन्नति का मौका: डिप्टी कलेक्टर भर्ती में फिर लागू हुआ 50/50 फॉर्मूला

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Shiv Mar 10, 2026 2 min read

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के सत्र के दौरान प्रशासनिक पदों पर भर्ती और…

March 10, 2026

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स्पंज आयरन इंडस्ट्री के विरोध में उतरे ग्रामीण, कार्रवाई नहीं होने पर लोकसभा चुनाव बहिष्कार की दी चेतावनी

बलौदाबाजार। एक बार फिर ग्रामीण स्पंज आयरन इंडस्ट्री के विरोध में सड़क पर उतरे हैं और कलेक्टर को कार्रवाई न होने पर लोकसभा चुनाव का बहिष्कार करने की चेतावनी दी है.

बलौदाबाजार से लगभग दस किमी दूर ग्राम खजरी के ग्रामीण वहां लग रहे स्पंज आयरन इंडस्ट्री का प्रारंभ से ही विरोध कर रहे हैं. पूर्व में कलेक्टर-एसडीएम को आवेदन देकर विरोध दर्ज कराया था और प्रदर्शन भी किया था पर प्रशासन की ओर से कोई कार्यवाही न होने और स्पंज आयरन इंडस्ट्री का पुनः कार्य प्रारंभ होने से नाराज ग्रामीण आज कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और कलेक्टर को लोकसभा चुनाव बहिष्कार का आवेदन दिया.

ग्रामीणों का कहना है कि पहले कंपनी यहां पावर प्लांट लगाई थी, जिससे उड़ते धुंए और कोयले से तो हम परेशान थे. अब कंपनी प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत से बगैर पंचायत का एनओसी लिए स्पंज आयरन इंडस्ट्री लगाने जा रही है. इससे आसपास के ग्रामीण परेशान हैं और भविष्य में होने वाले खतरे को लेकर चिंतित हैं. रायपुर के उरला, सिलतरा और उसके आसपास के गांव का हाल देख चुके हैं. वही यहां पर शिवनाथ नदी व जम नैया नाला है, जिसका ऊपयोग पीने के पानी के लिए करते हैं. इससे वह भी प्रदूषित हो जाएगा. इसे देखते हुए हम सब ग्रामीण इसका विरोध कर रहे हैं.

ग्रामीणों ने कहा, पूर्व में जब विरोध किए थे तो प्रशासन ने सहयोग करने की बात कही थी पर आज पुनः कंपनी काम चालू कर दिया है, जिसे लेकर हम विरोध करने आए हैं. तत्काल कार्रवाई नहीं होती है तो चुनाव बहिष्कार करेंगे. इसे लेकर कलेक्टर को आवेदन दिया है.

मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी : कलेक्टर

वहीं कलेक्टर केएल चौहान ने ग्रामीणों को समझाया और कहा कि चुनाव बहिष्कार आवश्यक नहीं है. मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी. बता दें कि पहले भी जब कंपनी पावर प्लांट लगाईं थी जिसका राख सड़कों पर फेक दिया था और गांव में डाल दिया था, जिससे पानी प्रदूषित होने लगा था. उस वक्त ग्रामीणों ने विरोध किया था पर अब कंपनी पावर प्लांट की आड़ में स्पंज आयरन इंडस्ट्री डाल रही है, जिसका ग्रामीण विरोध कर रहे हैं.