Special Story

तहसीलदारों को पदोन्नति का मौका: डिप्टी कलेक्टर भर्ती में फिर लागू हुआ 50/50 फॉर्मूला

तहसीलदारों को पदोन्नति का मौका: डिप्टी कलेक्टर भर्ती में फिर लागू हुआ 50/50 फॉर्मूला

Shiv Mar 10, 2026 2 min read

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के सत्र के दौरान प्रशासनिक पदों पर भर्ती और…

March 10, 2026

Apni Sarkaar

जो कहेंगे सच कहेंगे

युवक की बेरहमी से पिटाई का वीडियो वायरल, जेलर और प्रहरियों पर लगे गंभीर आरोप

सक्ती। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले की उपजिला जेल से मानवता को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली और उसमें व्याप्त ‘वीआईपी कल्चर’ की पोल खोल दी है। वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि जेल प्रांगण के बीचोबीच एक युवक को जेलर और प्रहरी मिलकर बुरी तरह पीट रहे हैं। युवक दया की भीख मांगता दिख रहा है, जबकि आसपास खड़े अन्य कर्मचारी मूकदर्शक बने हुए हैं।

जानकारी के मुताबिक, पीड़ित युवक अपने एक परिचित से मिलने जेल पहुंचा था। लेकिन जेलर और कर्मचारियों ने मिलने की अनुमति नहीं दी। वहीं दूसरी ओर, जेल में बंद कुछ आरोपियों के परिजनों को वीआईपी ट्रीटमेंट देते हुए अंदर मुलाकात की इजाजत दी जा रही थी। जब युवक ने इस दोहरे रवैये का विरोध किया और नियमों पर सवाल उठाया, तभी जेल कर्मियों का पारा चढ़ गया और उन्होंने दबंगई दिखाते हुए युवक की बीच प्रांगण में बेरहमी से पिटाई कर दी।

वीडियो के वायरल होते ही जिले में हड़कंप मच गया। लोगों में गुस्सा है और हर कोई जेल प्रशासन की मनमानी पर सवाल उठा रहा है। यह वीडियो न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि जेलों में मानवाधिकारों की स्थिति पर भी गंभीर चिंता जताता है।

सूत्रों के अनुसार, उपजिला जेल अधिकारी मामले को दबाने में जुटे हुए हैं। उच्चाधिकारियों को जानकारी न पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। वहीं स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने घटना की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि जेल में बंद लोगों या उनसे मिलने आने वालों के साथ ऐसा व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। जेल कानून व्यवस्था और अनुशासन का स्थान है, न कि सत्ता प्रदर्शन और अत्याचार का मंच।

अब सवाल यह है कि वीडियो में जो दृश्य साफ दिख रहे हैं, उन पर क्या कार्रवाई होगी? क्या आरोपी जेलर और प्रहरियों के खिलाफ विभागीय जांच होगी, या यह मामला भी ‘आंतरिक जांच’ की फाइलों में दबा दिया जाएगा?