Special Story

पुराना महापौर बंगला बनेगा ED का दफ्तर, नगर निगम की MIC बैठक में मंजूरी

पुराना महापौर बंगला बनेगा ED का दफ्तर, नगर निगम की MIC बैठक में मंजूरी

Shiv Mar 18, 2026 2 min read

रायपुर। राजधानी रायपुर में अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) का पता बदलने…

मुख्यमंत्री से मध्यप्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने की मुलाकात

मुख्यमंत्री से मध्यप्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने की मुलाकात

Shiv Mar 18, 2026 1 min read

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित…

रींवा-रायपुर हवाई सेवा से बढ़ी नजदीकियां मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल का छत्तीसगढ़ दौरा

रींवा-रायपुर हवाई सेवा से बढ़ी नजदीकियां मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल का छत्तीसगढ़ दौरा

Shiv Mar 18, 2026 2 min read

रायपुर। मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं लोक स्वास्थ्य तथा चिकित्सा…

March 18, 2026

Apni Sarkaar

जो कहेंगे सच कहेंगे

कोटवार के पद पर खानदानी हक नहीं, योग्यता और चरित्र ही अहम…

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कोटवारों की नियुक्ति को लेकर कहा है कि यह पद कोई वंशानुगत या खानदानी नहीं है, जिस पर केवल पूर्व कोटवार का बेटा ही हक जता सके. जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की सिंगल बेंच निकट संबंधी होने के नाते मिलने वाली प्राथमिकता केवल तभी लागू होती है जब अन्य सभी योग्यताएं समान हों.

बेमेतरा जिले के नवागढ़ तहसील के ग्राम गनियारी में पदस्थ कोटवार खेलनदास पनिका का 6 नवंबर 2010 को निधन हो गया था. मृत्यु के बाद रिक्त पद के लिए उनके बेटे परदेशी राम और एक अन्य ग्रामीण रामबिहारी साहू ने आवेदन किया था. प्रशासनिक प्रक्रिया के बाद राजस्व अधिकारियों ने रामबिहारी साहू को इस पद के लिए अधिक उपयुक्त पाया और उनकी नियुक्ति कर दी.

इस फैसले को परदेशी राम ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी. इसमें निकट संबंधी होने का हवाला देते हुए पिता की जगह अपनी नियुक्ति करने की मांग की थी. हाई कोर्ट ने इस मामले में दिए गए फैसले में कहा कि पुलिस रिपोर्ट के अनुसार परदेशी राम के खिलाफ वर्ष 1996 और 2013 में शांति भंग करने के आरोप में सीआरपीसी की धारा 107/116 के मामले दर्ज थे. कोटवार नियम 2 के तहत उम्मीदवार का चरित्र साफ होना अनिवार्य है.

वहीं, याचिका के समय परदेशी राम की उम्र 54 वर्ष थी, जबकि कोटवार की सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष है. वहीं, नियुक्त किए गए रामबिहारी साहू की उम्र 34 वर्ष थी. इस वजह से उसे लंबी सेवा के लिए अधिक उपयुक्त माना गया. इसके अलावा परदेशी राम केवल तीसरी कक्षा तक पढ़ा है, जबकि चयनित उम्मीदवार रामबिहारी साहू पांचवीं पास हैं. हाई कोर्ट ने माना कि बेहतर शिक्षा कर्तव्यों के निर्वहन में सहायक होती है.

विरासत का दावा करना गलत

हाईकोर्ट ने कहा कि कोटवार का पद छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 के तहत एक सांविधिक पद है. यह कोई निजी संपत्ति नहीं है जिसे वारिस को सौंप दिया जाए. सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न मामलों का हवाला देते हुए कहा कि अनुच्छेद 226 के तहत हाई कोर्ट का काम यह देखना है कि निर्णय लेने की प्रक्रिया सही थी या नहीं. राजस्व मंडल और कमिश्नर के आदेश को सही बताते हुए याचिका खारिज कर दी गई है.