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Shiv Mar 8, 2026 1 min read

कवर्धा। जिले के पिपरिया थाना क्षेत्र के ग्राम बानो में चोरों…

स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव की जयंती पर मुख्यमंत्री साय ने किया श्रद्धापूर्वक नमन

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Shiv Mar 8, 2026 2 min read

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पूर्व लोकसभा सांसद स्वर्गीय…

छत्तीसगढ़ के पूर्व डीजीपी विश्वरंजन का निधन, पटना के मेदांता अस्पताल में ली अंतिम सांस

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Shiv Mar 8, 2026 1 min read

रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विश्वरंजन का शनिवार…

अवैध प्लाटिंग पर चला प्रशासन का बुलडोजर, 1 एकड़ जमीन पर हो रहे निर्माण पर लगाई रोक

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Shiv Mar 8, 2026 1 min read

रायपुर। राजधानी रायपुर में अवैध निर्माण और अवैध प्लाटिंग के…

भाजपा नेता के खेत से 8 करोड़ का अफीम जब्त, मक्के के बीच पांच एकड़ से अधिक में उगाई थी फसल

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Shiv Mar 7, 2026 2 min read

दुर्ग। दुर्ग जिले में भाजपा नेता विनायक ताम्रकार के द्वारा किए…

March 8, 2026

Apni Sarkaar

जो कहेंगे सच कहेंगे

लाल आतंक के गढ़ ‘गोगुंडा’ में पहली बार लहराया ‘तिरंगा’, आजादी के दशकों बाद खत्म हुआ डर का साया, जंगलों में गूंजा ‘जन गण मन’

सुकमा। छत्तीसगढ़ के घोर नक्सल प्रभावित सुकमा जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने लोकतंत्र के प्रति विश्वास को और मजबूत कर दिया है. सुकमा का गोगुंडा इलाका, जो कभी नक्सलियों के खूनी खेल और दहशत के लिए जाना जाता था, आज वहां पूरी आन-बान और शान के साथ तिरंगा फहराया गया.

दशकों की खामोशी और डर पर लोकतंत्र की जीत

यह गोगुंडा के इतिहास में एक ऐतिहासिक पल था जब दशकों के सन्नाटे और खौफ को चीरते हुए राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ की गूंज सुनाई दी. जिस मिट्टी पर कभी नक्सलियों की हुकूमत चलती थी, आज वहां छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने राष्ट्रध्वज को सलामी दी. स्थानीय बुजुर्गों की आंखों में जहां सुकून और खुशी के आंसू थे, वहीं बच्चों के चेहरों की मुस्कान बता रही थी कि गोगुंडा अब ‘लाल आतंक’ की पहचान छोड़ विकास की ओर कदम बढ़ा चुका है.

सुरक्षा बलों की बड़ी कामयाबी

गोगुंडा में तिरंगा फहराना सुरक्षा बलों की एक बड़ी जीत मानी जा रही है. सीआरपीएफ (CRPF) 74वीं वाहिनी और जिला पुलिस के संयुक्त प्रयासों से यह संभव हो सका है. कमांडेंट हिमांशु पांडे के नेतृत्व और एसपी किरण चव्हाण के मार्गदर्शन में इलाके की तस्वीर बदली है. 

विकास की नई किरण

गोगुंडा में तिरंगा फहराने का मतलब सिर्फ ध्वजारोहण नहीं, बल्कि वहां सरकारी योजनाओं और सुविधाओं की पहुंच का संकेत है. प्रशासन का कहना है कि अब यह क्षेत्र ‘संविधान की शान’ बनेगा और नक्सलियों के डर को खत्म कर बुनियादी सुविधाएं हर घर तक पहुंचाई जाएंगी.