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विपक्षी सदस्यों के व्यवहार से नाराज हुए स्पीकर, डॉ. रमन की कड़ी टिप्पणी, कहा- 25 साल के संसदीय परम्पराओं की उड़ाई धज्जियां

रायपुर। निलंबन के बावजूद विपक्षी विधायक सदन से बाहर नहीं निकले और गर्भगृह में ही नारेबाजी करते रहे। विपक्ष के इस रुख की वजह से विधानसभा अध्यक्ष ने तीखी नाराजगी जतायी। दरअसल गुरुवार को सदन का प्रश्नकाल काफी हंगामेदार रहा।राज्य में डीएपी (DAP) खाद की कमी पर नाराजगी जताते हुए विपक्ष ने जोरदार नारेबाज़ी शुरू कर दी। विपक्षी विधायकों ने गर्भगृह तक पहुँचकर प्रदर्शन किया और विधानसभा अध्यक्ष के निर्देशों की भी अवहेलना की।

अध्यक्ष के बार-बार आग्रह के बावजूद विपक्षी विधायक सदन के बाहर नहीं गये। सदन में अमर्यादित व्यवहार पर विधानसभा अध्यक्ष ने नाराज़गी जताते हुए कहा, “प्रतिपक्ष के सदस्य निरंतर असंसदीय व्यवहार कर रहे हैं और सदन की परंपराओं को ध्वस्त कर रहे हैं। यह नुकसान छत्तीसगढ़ की लोकतांत्रिक परंपरा का है।”

स्थिति बिगड़ती देख अध्यक्ष ने पहले सदन को दोपहर 12 बजे तक स्थगित किया। गर्भगृह में पहुँचकर लगातार विरोध कर रहे विधायकों को निलंबित कर दिया गया। निलंबन के बावजूद विपक्ष के विधायक गर्भगृह में डटे रहे और नारे लगाते रहे।

सदन की कार्यवाही पुनः शुरू होने पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार से सवाल किया कि अब तक खाद वितरण का कितना लक्ष्य तय हुआ और उसमें से कितना निजी क्षेत्र और सहकारी समितियों को आवंटित किया गया है।

इसके जवाब में कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा, “अब तक 1 लाख 72 हजार मीट्रिक टन डीएपी की आपूर्ति हो चुकी है। डीएपी की यह समस्या केवल राज्य की नहीं, बल्कि एक वैश्विक समस्या है। सरकार खाद आपूर्ति करने वाली कंपनियों से लगातार संपर्क में है और जल्द ही नई खेप आने वाली है।”

लेकिन मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने एक बार फिर नारेबाज़ी शुरू कर दी, जिससे सदन का माहौल फिर से तनावपूर्ण हो गया।