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शिक्षा सचिव को हाईकोर्ट ने किया तलब, 17 अक्टूबर को होना होगा पेश

बिलासपुर।  हाईकोर्ट ने शिक्षा सचिव को तलब किया है। अगली सुनवाई में सचिव को व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा। दरअसल हाईकोर्ट ने  प्रदेश में चल रहे गैर-मान्यता प्राप्त नर्सरी और प्राइमरी स्कूलों पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि अब तक ऐसे स्कूलों पर क्या कार्रवाई हुई है। पिछली सुनवाई में चीफ जस्टिस ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा था कि नर्सरी स्कूल ऐसे खुल रहे हैं जैसे गली-मोहल्लों में पान की दुकान। कोर्ट ने शिक्षा सचिव को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से पेश होकर कार्रवाई की स्थिति बताने का आदेश दिया है।

शिक्षा के अधिकार और गैर-मान्यता प्राप्त स्कूलों को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान बुधवार को हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से सख्त सवाल किए। मुख्य न्यायाधीश की बेंच ने पूछा कि प्रदेश में चल रहे अवैध और गैर-मान्यता प्राप्त स्कूलों के खिलाफ अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि पिछली सुनवाई में जो दिशा-निर्देश दिए गए थे, उनका पालन हुआ या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है।

चीफ जस्टिस की तीखी टिप्पणी

पिछली सुनवाई में चीफ जस्टिस ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा था,

“गली-मोहल्लों में बिना मान्यता के नर्सरी स्कूल ऐसे खोले जा रहे हैं जैसे पान की दुकान हो। बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है और स्कूल मालिक मर्सिडीज में घूम रहे हैं।”

कोर्ट ने यह भी कहा था कि 2013 से नर्सरी स्कूलों के लिए मान्यता लेने का प्रावधान है। इसके बावजूद यदि आज भी ऐसे स्कूल बिना अनुमति चल रहे हैं, तो यह सीधे-सीधे अपराध की श्रेणी में आता है।

जनहित याचिका में उठाए गए मुद्दे

यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता भगवंत राव ने एडवोकेट देवर्षि ठाकुर के माध्यम से दायर की है। याचिका में दो अहम मुद्दों पर कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की गई है –

निजी स्कूलों में RTE का उल्लंघन: याचिका में कहा गया है कि निजी स्कूल शिक्षा के अधिकार (RTE) कानून के तहत दस प्रतिशत कमजोर वर्ग के बच्चों को प्रवेश नहीं दे रहे।

गैर-मान्यता प्राप्त स्कूलों का संचालन: बड़ी संख्या में नर्सरी और प्राइमरी स्कूल बिना किसी सरकारी अनुमति के चल रहे हैं, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता और बच्चों की सुरक्षा पर प्रश्न खड़े होते हैं।

सरकार का जवाब असंतोषजनक

बुधवार को हुई सुनवाई में शासन की ओर से पेश जवाब को कोर्ट ने असंतोषजनक पाया। मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट कहा कि केवल कागजों पर कार्रवाई का दावा करना पर्याप्त नहीं है। कोर्ट ने शिक्षा सचिव को अगली सुनवाई में स्वयं उपस्थित होकर बताने का आदेश दिया कि अब तक क्या कार्रवाई की गई है और आगे क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे।

अगली सुनवाई 17 अक्टूबर को

इस मामले की अगली सुनवाई 17 अक्टूबर को तय की गई है। तब तक सरकार को अपनी कार्ययोजना और कार्रवाई रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश करनी होगी। माना जा रहा है कि इस सुनवाई में प्रदेश के सभी गैर-मान्यता प्राप्त स्कूलों पर बड़ी कार्रवाई की दिशा तय हो सकती है।