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हाईकोर्ट ने 19 एकड़ जमीन राजसात करने की कार्रवाई पर रोक लगाई

बिलासपुर। तिफरा सेक्टर-डी की 19.35 एकड़ जमीन को नगर निगम द्वारा अवैध कॉलोनी बताते हुए राजसात किए जाने के विवाद में शुक्रवार को हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। जस्टिस पार्थ प्रतिम साहू की सिंगल बेंच ने नगर निगम की जल्दबाजी पर नाराजगी जताते हुए कार्रवाई पर लगे स्टे को बरकरार रखा और राज्य शासन को भी इस मामले में पक्षकार बनाने के निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा कि जब तक पूरी प्रक्रिया स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक इस तरह की बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई उचित नहीं कही जा सकती।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने विस्तृत दलीलें प्रस्तुत कीं। उनका कहना था कि संबंधित 19 एकड़ जमीन का लेआउट वर्ष 2003 में ही विधिवत स्वीकृत हो चुका था और वर्ष 2008 तक उसकी वैध रूप से खरीदी-बिक्री भी होती रही। चूंकि छत्तीसगढ़ कॉलोनी अधिनियम वर्ष 2012 में लागू हुआ, इसलिए इस भूमि पर उसे लागू करना कानूनी रूप से संभव ही नहीं है।

याचिकाकर्ताओं ने यह भी बताया कि 2008 के बाद इस क्षेत्र में कोई नया विकास कार्य नहीं हुआ है, इसलिए निगम द्वारा लागू की जा रही धारा 292-च और 292-छ का इस प्रकरण से कोई संबंध नहीं है। उनका आरोप था कि नगर निगम 50 साल पुरानी इस जमीन पर कब्जा करने की जल्दबाजी में ऐसी कार्रवाई कर रहा है, जिससे उनके वैध अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।

निगम की जल्दबाज़ी पर कोर्ट की सख़्त टिप्पणी

कोर्ट ने विशेष रूप से इस बात पर नाराजगी जताई कि नगर निगम ने स्वयं 4 नवंबर को कोर्ट से जवाब प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा था और 12 नवंबर को जवाब दाखिल भी किया। इसके बावजूद यह जानते हुए कि 13 नवंबर को सुनवाई तय है, उसने उससे पहले ही जमीन को राजसात करने का आदेश जारी कर एसडीएम को राजस्व रिकॉर्ड बदलने का निर्देश भी दे दिया। कोर्ट ने इसे प्रक्रिया के विपरीत माना और तत्काल रोक लगाने का आदेश दिया।

निगम की दलील और जांच समिति की सिफारिशें

नगर निगम की ओर से पेश दलीलों में कहा गया कि कॉलोनी अवैध है और कॉलोनाइजर सुरेंद्र जायसवाल को पहले तीन नोटिस जारी किए गए थे। दावा–आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद कलेक्टर ने दस सदस्यीय जांच समिति नियुक्त की थी। इस समिति ने छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 की धारा 292-1, 292-च और 292-छ के तहत कार्रवाई की सिफारिश की, जिसके आधार पर 19.35 एकड़ जमीन को राजसात घोषित किया गया।

निगम के अनुसार कई खसरा नंबरों में अवैध प्लॉटिंग के प्रमाण मिले थे। दूसरी ओर कॉलोनाइजर ने इन नोटिसों को विभिन्न याचिकाओं में हाईकोर्ट में चुनौती दी हुई है, जो अभी विचाराधीन हैं।

इसी दिन एक अन्य मामले में भी सुनवाई

साथ ही, इसी दिन हाईकोर्ट ने औद्योगिक प्रदूषण से श्रमिकों के बीमार होने के मामले में भी सुनवाई की। कोर्ट ने इस प्रकरण में 37 और उद्योगों को पक्षकार बनाने के निर्देश दिए तथा कोर्ट कमिश्नर की रिपोर्ट पर अगली सुनवाई 15 दिसंबर को तय की है।