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March 9, 2026

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हाईकोर्ट ने खारिज की शिक्षक की याचिका, NIA अफसरों पर लगाया था गंभीर आरोप, जानिए पूरा मामला…

बिलासपुर।  एनआईए स्पेशल कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर आज हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। शिक्षक ने एनआईए के अफसरों पर गंभीर आरोप लगाया है. उन्होंने हाईकोर्ट से कहा कि जांच के बहाने अफसर उसे नक्सल मामले में फंसाना चाहते हैं। इधर जांच एजेंसी की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता ने डिवीजन बेंच को बताया कि शिक्षक पत्नी की मोबाइल व इलेक्ट्रानिक डिवाइस की जांच बेहद जरूरी है। नक्सल गतिविधियों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की संभावना है। अधिवक्ता के तर्कों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने शिक्षक की याचिका को खारिज कर दिया है।

मामले की सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच ने कहा कि राष्ट्रीय हित के मुद्दे की जांच बेहद जरूरी है। लिहाजा मोबाइल व इलेक्ट्रानिक डिवाइस की जांच के लिए एनआईए को फ्रीहैंड दे दिया है। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच में हुई।

दरअसल, मोहला मानपुर अंबागढ़ चौकी जिले के बाजार पारा, मानपुर में पदस्थ प्राइमरी स्कूल के शिक्षक अंगद सिंह सलामे ने एनआईए स्पेशल कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए याचिका लगाई है, जिसमें उन्होंने कहा कि एनआईए ने बिना पूर्व सूचना के कई बार उससे पूछताछ की। उसके बाद पत्नी के मोबाइल व इलेक्ट्रानिक डिवाइस भी जब्त कर लिया है। शिक्षक ने आरोप लगाया है कि एनआईए के अफसरों ने उससे एक संदिग्ध नक्सली को सरेंडर कराने की बात कही थी। सरेंडर ना कराने की स्थिति में गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी थी।

एनआईए की तरफ से पैरवी करते हुए अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता शिक्षक द्वारा लगाए जा रहे आरोप बेबुनियाद है। जांच के दौरान इकट्ठे किए गए सबूत से यह पुष्टि हो रही है कि नक्सल गतिविधियों में शिक्षक की संलिप्तता की पूरी संभावना है। जब्त किए गए सामान व इलेक्ट्रानिक डिवाइस की जांच से खुलासे होने की संभावना है।

मामले की सुनवाई के बाद चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में लिखा है कि छत्तीसगढ़ नक्सल प्रभावित राज्य है। यहां राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी गंभीर चुनौतियां है। केंद्र व राज्य सरकार बस्तर को नक्सल समस्या से मुक्त करने की पूरी कोशिश कर रही है। नक्सल गतिविधियों से राज्य की आंतरिक सुरक्षा के साथ ही आम लोगों को भी खतरा है। इससे राष्ट्रीय हित भी प्रभावित होता है। ऐसे में वर्तमान जांच को बाधित नहीं किया जा सकता.