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सरकारी राशन दुकान में सेंधमारी, ताला तोड़कर 26 क्विंटल चावल और इलेक्ट्रॉनिक कांटा ले उड़े चोर

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Shiv Mar 8, 2026 1 min read

कवर्धा। जिले के पिपरिया थाना क्षेत्र के ग्राम बानो में चोरों…

स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव की जयंती पर मुख्यमंत्री साय ने किया श्रद्धापूर्वक नमन

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Shiv Mar 8, 2026 2 min read

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पूर्व लोकसभा सांसद स्वर्गीय…

छत्तीसगढ़ के पूर्व डीजीपी विश्वरंजन का निधन, पटना के मेदांता अस्पताल में ली अंतिम सांस

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Shiv Mar 8, 2026 1 min read

रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विश्वरंजन का शनिवार…

अवैध प्लाटिंग पर चला प्रशासन का बुलडोजर, 1 एकड़ जमीन पर हो रहे निर्माण पर लगाई रोक

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Shiv Mar 8, 2026 1 min read

रायपुर। राजधानी रायपुर में अवैध निर्माण और अवैध प्लाटिंग के…

भाजपा नेता के खेत से 8 करोड़ का अफीम जब्त, मक्के के बीच पांच एकड़ से अधिक में उगाई थी फसल

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Shiv Mar 7, 2026 2 min read

दुर्ग। दुर्ग जिले में भाजपा नेता विनायक ताम्रकार के द्वारा किए…

March 8, 2026

Apni Sarkaar

जो कहेंगे सच कहेंगे

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, मारपीट-लूट मामले में 5 आरोपियों की FIR की रद्द

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने एक अहम फैसले में पुलिस थाना सिरगिट्टी में दर्ज मारपीट और लूट से जुड़ी एफआईआर को निरस्त कर दिया है. न्यायालय ने स्पष्ट किया कि आरोपों में प्रथम दृष्टया अपराध के आवश्यक तत्व नहीं बनते और कार्रवाई जारी रखना न्याय प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा. यह आदेश मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा एवं न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने पारित किया.

जानिए क्या था मामला ?

याचिकाकर्ता सुमन यादव, इंदु चंद्रा, नंद राठौर, मोहम्मद इस्लाम और राहुल जायसवाल के विरुद्ध 7 सितंबर 2024 को अपराध दर्ज किया गया था. शिकायतकर्ता के अनुसार 6 सितंबर की रात ग्रामीण बैंक, तिफरा के पास आरोपियों ने गाली-गलौज, मारपीट कर सोने की चेन छीन ली. इसके आधार पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराओं 115(2), 296, 3(5) और 304(1) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया.

याचिकाकर्ताओं ने दिए यह तर्क

याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि एफआईआर दर्ज करने में करीब 13 घंटे की देरी है, जो संदेह पैदा करती है. घटना के पहले याचिकाकर्ताओं ने 112 नंबर पर सूचना दी थी और अभिव्यक्ति ऐप के माध्यम से भी शिकायत की गई थी. सीसीटीवी फुटेज भी उनके पक्ष में होने का दावा किया गया. याचिकाकर्ताओं ने इसे प्रतिशोध में दर्ज काउंटर ब्लास्ट एफआईआर बताया. वहीं राज्य की ओर से कहा गया कि, एफआईआर में संज्ञेय अपराध बनता है, जांच पूर्ण हो चुकी है और चालान पेश किया जा चुका है. ऐसे में एफआईआर रद्द करने का कोई आधार नहीं है.

हाईकोर्ट ने निरस्त की एफआईआर

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि यदि एफआईआर के आरोपों को पूरी तरह स्वीकार भी कर लिया जाए, तब भी अपराध के आवश्यक तत्व सिद्ध नहीं होते. एफआईआर में देरी, याचिकाकर्ताओं की पूर्व शिकायतें और रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री अभियोजन की कहानी पर गंभीर संदेह उत्पन्न करती है. अदालत ने माना कि इस स्थिति में आपराधिक कार्रवाई जारी रखना न्याय का उद्देश्य पूरा नहीं करता, बल्कि प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा. हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए थाना सिरगिट्टी, जिला बिलासपुर में दर्ज अपराध क्रमांक 624/2024 को सभी पांचों याचिकाकर्ताओं के विरुद्ध पूरी तरह निरस्त (क्वैश) कर दिया.