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सौतेले पिता को हाईकोर्ट ने नहीं माना उत्तराधिकारी, बीमा राशि पाने की हकदार मां

बिलासपुर। हाईकोर्ट ने एक फैसले में कहा है कि अविवाहित महिला की मां ही उसकी असली उत्तराधिकारी है। दरअसल, महिला कांस्टेबल की मौत के बाद उसके कथित दत्तक पिता होने का दावा करते हुए चल-अचल संपत्ति पर दावा किया था। जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। जिसके खिलाफ सिविल रिवीजन को भी हाईकोर्ट के जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास ने खारिज कर दी है। दरअसल, रायगढ़ की रहने वाली ज्योति पटेल पुलिस विभाग में कांस्टेबल के पद पर थी। उन्होंने शादी नहीं की थी। इस बीच ज्योति पटेल की साल 2014 में मौत हो गई। मृत्यु के समय वह अविवाहित थी। अपनी सेवा के दौरान उन्होंने बीमा पॉलिसियां ली थी। साथ ही बैंक खातों में रकम जमा थी।

उसकी मौत के बाद खितिभूषण पटेल ने दत्तक पिता होने का दावा करते हुए अदालत में कई आवेदन पेश किए थे। कहा कि ज्योति को उसकी मां ने त्याग दिया था। उसने ही उसकी देखभाल की। वर्ष 2005 में गोद लिया था। इसके पहले उसे शिक्षा दिलाई। इस आधार पर उसने ज्योति की संपत्ति पर अधिकार की मांग की थी। दूसरी ओर, मृतका की मां फुलकुमारी पटेल ने खुद को कानूनी उत्तराधिकारी बताते हुए आपत्ति दर्ज की और संपत्ति पर दावा किया। कोर्ट ने पाया कि दत्तक ग्रहण का कोई वैध प्रमाण या रस्म से संबंधित सबूत रिकॉर्ड में नहीं है। न ही यह साबित हुआ कि दत्तक ग्रहण नियमों के मुताबिक हुआ था।

हाईकोर्ट ने फैसले में कहा कि ज्योति अविवाहित थी, उसके पिता की पूर्व में ही मौत हो चुकी थी, इस वजह से उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 15 और 16 के अनुसार उसकी मां ही उसकी संपत्ति की कानूनी उत्तराधिकारी होगी। इसके अलावा कहा कि बीमा पॉलिसियों और बैंक खातों में नामित व्यक्ति को ही राशि प्राप्त करने का अधिकार होता है। उत्तराधिकार का निर्धारण उत्तराधिकार कानून के अनुसार ही होता है। ज्योति पटेल की कुल संपत्ति 26.57 लाख रुपए थी, जिसमें वेतन खाता, फिक्सड डिपॉजिट, बचत खाते और बीमा पॉलिसियों की रकम शामिल थी। फैसले के बाद पूरी रकम मां को मिलेगी।