Special Story

आयुष्मान योजना के क्रियान्वयन पर विधानसभा में सवाल, स्वास्थ्य मंत्री से जवाब तलब

आयुष्मान योजना के क्रियान्वयन पर विधानसभा में सवाल, स्वास्थ्य मंत्री से जवाब तलब

Shiv Mar 11, 2026 2 min read

रायपुर। छत्तीसगढ़ में आयुष्मान कार्ड का समुचित लोगों को नहीं…

IAS निरंजन दास ने सरकारी खजाने में हेराफेरी की, नहीं दे सकते जमानत : हाईकोर्ट

IAS निरंजन दास ने सरकारी खजाने में हेराफेरी की, नहीं दे सकते जमानत : हाईकोर्ट

Shiv Mar 11, 2026 2 min read

बिलासपुर। प्रदेश के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के…

March 11, 2026

Apni Sarkaar

जो कहेंगे सच कहेंगे

सरकार ने जनगणना कार्य के समन्वय के लिए IAS मनोज कुमार पिंगुआ को बनाया नोडल अधिकारी

रायपुर। देश में 2027 में जनगणना होगी। 16 जून को इसे लेकर केंद्र सरकार ने अधिसूचना भी जारी कर दी है। जनगणना को लेकर केंद्र और राज्य में कार्डिनेशन के लिए हर राज्य में एक नोडल अफसर बनाया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में कार्डिनेशन के लिए ACS मनोज कुमार पिंगुआ को नोडल अफसर नियुक्त किया गया है।

देश में पहली बार जनगणना और जातिगत जनगणना एक साथ कराई जा रही है। वैसे तो भारत में जनगणना हर 10 साल बाद होती है, जिसके जरिए देश की आबादी, सामाजिक-आर्थिक स्थिति और अन्य महत्वपूर्ण आंकड़ों को जमा किया  जाता है। जनगणना दुनिया के सबसे बड़े प्रशासनिक अभ्यासों में से एक है, जिसे गृह मंत्रालय के तहत आने वाला ऑफिस ऑफ रजिस्ट्रार जनरल और सेंसस कमिश्नर करवाता है।

कोरोना महामारी के कारण 2021 में होने वाली जनगणना टल गई थी और अब यह 2025 में शुरू हो रही है. इसी वजह से अब जनगणना के सर्किल में भी बदलाव हो गया है और इसके बाद अगली जनगणना 2035 में कराई जाएगी। इस बार जनगणना की प्रक्रिया दो फेज में पूरी होगी. पहला चरण एक अक्टूबर 2026 तक पूरा किया जाएगा, जबकि दूसरा और अंतिम चरण एक मार्च 2027 तक पूरा होगा।

इसके लिए एक मार्च 2027 की मिड नाइट को रेफरेंस डेट माना जाएगा। यानी उस समय देश की जनसंख्या और सामाजिक स्थिति का जो भी आंकड़ा होगा, वही रिकॉर्ड में दर्ज किया जाएगा. इस दिन के बाद से आंकड़े सार्वजनिक रूप से सामने आने लगेंगे। हिमालयी और विशेष भौगोलिक हालात वाले राज्यों जैसे जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और उत्तराखंड में यह प्रक्रिया अन्य राज्यों से पहले अक्टूबर 2026 तक पूरी कर ली जाएगी। इन इलाकों में मौसम की कठिनाइयों और दुर्गम क्षेत्रों को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। इन राज्यों के लिए एक अक्टूबर 2026 को रेफरेंस डेट माना जाएगा।