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Shiv Mar 9, 2026 2 min read

बिलासपुर। जिले में प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त करने के उद्देश्य से…

निर्विरोध राज्यसभा सांसद चुनी गईं लक्ष्मी वर्मा और फूलोदेवी नेताम, विधानसभा पहुंचकर लिया प्रमाण पत्र, समर्थकों ने दी बधाई

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Shiv Mar 9, 2026 2 min read

रायपुर। छत्तीसगढ़ से भाजपा प्रत्याशी लक्ष्मी वर्मा और कांग्रेस प्रत्याशी फूलोदेवी…

अस्पताल परिसर में लगी भीषण आग, आधा दर्जन कंडम एंबुलेंस समेत अन्य वाहन जलकर खाक

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Shiv Mar 9, 2026 1 min read

कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा स्थित जिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल परिसर में…

बिलासपुर में अवैध हुक्का बार पर पुलिस की दबिश, होटल मैनेजर गिरफ्तार

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Shiv Mar 9, 2026 2 min read

बिलासपुर। जिले में अवैध रूप से संचालित हुक्का बार पर…

March 9, 2026

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जो कहेंगे सच कहेंगे

सरकार ने जनगणना कार्य के समन्वय के लिए IAS मनोज कुमार पिंगुआ को बनाया नोडल अधिकारी

रायपुर। देश में 2027 में जनगणना होगी। 16 जून को इसे लेकर केंद्र सरकार ने अधिसूचना भी जारी कर दी है। जनगणना को लेकर केंद्र और राज्य में कार्डिनेशन के लिए हर राज्य में एक नोडल अफसर बनाया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में कार्डिनेशन के लिए ACS मनोज कुमार पिंगुआ को नोडल अफसर नियुक्त किया गया है।

देश में पहली बार जनगणना और जातिगत जनगणना एक साथ कराई जा रही है। वैसे तो भारत में जनगणना हर 10 साल बाद होती है, जिसके जरिए देश की आबादी, सामाजिक-आर्थिक स्थिति और अन्य महत्वपूर्ण आंकड़ों को जमा किया  जाता है। जनगणना दुनिया के सबसे बड़े प्रशासनिक अभ्यासों में से एक है, जिसे गृह मंत्रालय के तहत आने वाला ऑफिस ऑफ रजिस्ट्रार जनरल और सेंसस कमिश्नर करवाता है।

कोरोना महामारी के कारण 2021 में होने वाली जनगणना टल गई थी और अब यह 2025 में शुरू हो रही है. इसी वजह से अब जनगणना के सर्किल में भी बदलाव हो गया है और इसके बाद अगली जनगणना 2035 में कराई जाएगी। इस बार जनगणना की प्रक्रिया दो फेज में पूरी होगी. पहला चरण एक अक्टूबर 2026 तक पूरा किया जाएगा, जबकि दूसरा और अंतिम चरण एक मार्च 2027 तक पूरा होगा।

इसके लिए एक मार्च 2027 की मिड नाइट को रेफरेंस डेट माना जाएगा। यानी उस समय देश की जनसंख्या और सामाजिक स्थिति का जो भी आंकड़ा होगा, वही रिकॉर्ड में दर्ज किया जाएगा. इस दिन के बाद से आंकड़े सार्वजनिक रूप से सामने आने लगेंगे। हिमालयी और विशेष भौगोलिक हालात वाले राज्यों जैसे जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और उत्तराखंड में यह प्रक्रिया अन्य राज्यों से पहले अक्टूबर 2026 तक पूरी कर ली जाएगी। इन इलाकों में मौसम की कठिनाइयों और दुर्गम क्षेत्रों को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। इन राज्यों के लिए एक अक्टूबर 2026 को रेफरेंस डेट माना जाएगा।