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नगर निगम के सामने का गार्डन बदहाल : नशेड़ियों का बना अड्‌डा, शहरवासी बोले – ठेकेदार मेंटेनेंस के नाम पर लाखों वसूल रहे पर गार्डन की हालत बदतर

रायपुर। पूरे शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने की बागडोर जिस नगर निगम के हाथों में है, ठीक उसी निगम के सामने का गार्डन नशेड़ियों का अड्‌डा बन गया है. मेंटेनेंस नहीं होने से गार्डन मैदान में तब्दील हो चुका है. शहर के युवाओं का कहना है कि निगम के अधिकारी और ठेकेदार गार्डन मेंटनेंस के नाम पर गार्डन में लगे दुकानदारों से लाखों रुपए वसूल रहे पर गार्डन का कोई मेंटेनेंस नहीं हो रहा. गार्डन के सामने निगम में महापौर, कमिश्नर समेत तमाम अधिकारी बैठते हैं, उनके नाक के नीचे ही कमीशनखोरी का खेल चल रहा है. शहर के युवाओं ने कहा, महापौर मीनल चौबे जब नेता प्रतिपक्ष थी तो गार्डन की हालत को लेकर सवाल उठाती थी. अब महापौर बन गई हैं तो क्या गार्डन की हालत सुधर गई है, अब कार्रवाई क्यों नहीं कर रहीं ?

नाममात्र का शौचालय, कार्रवाई क्यों नहीं हो रही : राहुल

शहर के युवा राहुल गोस्वामी ने कहा, गार्डन अब मैदान बन चुका है. निगम गार्डन नहीं निगम चौपाटी बन गया है. यह नशेड़ियों का अड्डा बन गया है. नगर पालिका निगम रायपुर के सामने ही वाले गार्डन में लगभग 20 रेस्टोरेंट, कैफे, चाय सेंटर, नास्ता सेंटर, पिज्जा सेंटर संचालित हो रही है. ठेकेदार दुकानदारों से गार्डन मेंटनेंस के नाम पर लाखों, करोड़ों रुपए वसूल रहा है पर मेंटेनेंस नहीं किया गया है. इसके चलते गार्डन की हालत बदतर हो गई है. यहां CCTV कैमरे नहीं है. माली नहीं है, सिक्योरिटी गार्ड नहीं है, पीने का पानी नहीं है. यहां नाममात्र का शौचालय है, जहां जाते ही बीमारी का शिकार हो जाएंगे. ठेका में इन सभी मेंटनेंस करने का प्रावधान है पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है. उन्होंने कहा, अखबार में पढ़ते थे, TV में हम देखते थे, महापौर मीनल चौबे जब नेता प्रतिपक्ष थी तो गार्डन की हालत को लेकर सवाल उठाती थी. अब महापौर बन गई हैं तो क्या गार्डन की हालत सुधर गई है, अब कार्रवाई क्यों नहीं कर रहीं ?

गार्डन की स्थिति बदतर, जगह-जगह कचरों को लगाई गई है आग : तनय

गौसेवक तनय लूलिया ने कहा, गार्डन की अव्यवस्था को लेकर हमने पहले भी शिकायत की है, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई. यहां प्लास्टिक और कचरा को फेंक दिया जाता है, जिसे पशु खाकर बीमार हो रहे हैं. कचरा में आग लगाना मना है, बावजूद गार्डन में जगह-जगह कचरों पर आग लगाई गई है. गार्डन की स्थिति बद से बदतर हो गई है. अब महापौर से उम्मीद है कि इन सभी को ठीक कराएं और लापरवाह, कमीशन खाने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई करें.

सिर्फ कमीशनखोरी का खेल चल रहा : समीर

प्रकृति प्रेमी समीर ने कहा, जब ये टेंडर नहीं हुआ था तो गार्डन हरा भरा था. लोगों को लगता था कि वो गार्डन में बैठे हैं. अब लगता है कि चौपाटी है. सामने में नगर पालिका निगम का कार्यालय हैं, जहां महापौर, कमिश्नर और तमाम अधिकारी बैठते हैं. बावजूद ये हाल है. इससे समझा जा सकता है कि कितनी गंभीरता से निगम के जनप्रतिनिधि, अधिकारी और कर्मचारी काम कर रहे हैं. सिर्फ और सिर्फ कमीशनखोरी का खेल हो रहा है. गार्डन नशेड़ियों का अड्डा बन गया है. यहां लड़की दलाल सक्रिय हैं. लोग नशे की हालात में गार्डन में पड़े रहते हैं. यहां एक ही गार्डन नहीं पूरे दर्जनभर गार्डनों का यही हाल है. अगर अधिकारी कमीशन नहीं खा रहे हैं तो कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे ?

व्यवस्था नहीं सुधरी तो कोर्ट जाने की चेतावनी

युवाओं का यह भी कहना है कि गार्डन का व्यवसायीकरण कर दिया गया है. यहां सुबह से रात तक चौपाटी जैसे हालात रहता है. इस पर नगर निगम यदि कार्रवाई नहीं करती है तो कोर्ट जाएंगे. NGT और हाईकोर्ट का आदेश है कि तालाब, नदी और गॉर्डनों का व्यवसायीकरण नहीं किया जा सकता है. गार्डन के सामने निगम में महापौर, कमिश्नर समेत तमाम अधिकारी बैठते हैं, उनके नाक के नीचे ये खेल चल रहा है.

गणपति इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया है ठेका

नगर निगम से मिली जानकारी के मुताबिक गणपति इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड के ठेकेदार मयंक अग्रवाल को गार्डन का ठेका दिया गया है, जो साल में साढ़े छह लाख रुपए निगम को देता है. इसके एवज में 20 प्रतिशत जमीन गार्डन का दिया गया है, जिसमें दुकानें संचालित हो रही है. इसका किराया ठेकेदार को जाता है. गार्डन के मेंटनेंस का जिम्मा ठेकेदार का है. सुरक्षा गार्ड, माली, गार्डन में हरियाली, पानी व्यवस्था, सफ़ाई, शौचालय, CCTV कैमरे जैसी व्यवस्था की जिम्मेदारी ठेकेदार मयंक अग्रवाल की है.

दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी : महापौर

इस मामले में महापौर मीनल चौबे ने कहा, मैं नेता प्रतिपक्ष थी तब भी इस पर सवाल उठाई थी. अभी महापौर बन चुकी हूं. गार्डन मेंटनेंस के लिए निगम और ठेकेदार के बीच OMU हुआ है. कितने सालों का ठेका हुआ है. मेंटेनेंस में क्या-क्या करना था, इस विषय पर अधिकारियों से जानकारी लेती हूं. जिस तरह से शिकायतें आ रही है इस पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी. मैं स्वयं जाकर गार्डन का जायजा लूंगी.