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दुर्ग में 5 एकड़ में अवैध अफीम की खेती का खुलासा, पौधे उखाड़ने की कार्रवाई शुरू

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Shiv Mar 9, 2026 2 min read

दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के समोदा में अवैध रूप से…

गैस सिलेंडर के दाम बढ़े, कांग्रेस ने किया विरोध प्रदर्शन, पीएम की फूंका पुतला

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Shiv Mar 9, 2026 1 min read

राजनांदगांव। देश भर में 7 मार्च से घरेलू में 60 रुपए…

शराब पर सियासत गर्म : भूपेश बघेल ने पोस्ट किया वीडियो, लिखा- बियर के अंदर बियर

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Shiv Mar 8, 2026 2 min read

रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेलने रविवार को सोशल मीडिया…

चन्द्रनाहू कुर्मी क्षत्रिय समाज के अधिवेशन में शामिल हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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Shiv Mar 8, 2026 3 min read

रायपुर। जब समाज स्वयं अपने बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी…

महतारी वंदन योजना से मातृशक्ति को मिला आर्थिक संबल : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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Shiv Mar 8, 2026 8 min read

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के…

March 9, 2026

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माओवादियों की ओर से लिखित सीजफायर लेटर की जांच होगी : उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा

कवर्धा। माओवादियों की केंद्रीय कमेटी ने अस्थायी रूप से हथियारबंद संघर्ष रोकने और सरकार से शांति वार्ता करने की पेशकश की है. इस पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने अपनी पहली प्रतिक्रिया में कहा कि जब तक यह साबित नहीं हो जाता कि पत्र वास्तव में माओवादी नेतृत्व की ओर से आया है, तब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाएगा.

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने मीडिया से चर्चा में कहा कि अगर पत्र की सत्यता सिद्ध होती है तो सरकार वार्ता की दिशा में कदम बढ़ाने पर विचार करेगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार शांति की समर्थक है, लेकिन किसी भी प्रकार की रणनीति या छल से सावधानी बरतना जरूरी है.

दरअसल, माओवादियों ने राज्य सरकार को एक चिट्ठी भेजी है, जिसमें संघर्ष विराम और वार्ता की अपील की गई है. यह फैसला नक्सल आंदोलन के भविष्य को लेकर एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है. इस पत्र को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने इसे जांच के लिए संबंधित एजेंसियों को सौंपा है.

पत्र में माओवादियों ने बताया कि मार्च 2025 से उनकी पार्टी सरकार के साथ ‘शांति वार्ता’ के लिए गंभीर एवं ईमानदारी के साथ प्रयास कर रही है. 10 मई को पार्टी के महासचिव ने प्रेस बयान जारी कर पार्टी के हथियार छोड़ने का उल्लेख करते हुए पार्टी के सर्वोच्च नेतृत्वकारी कामरेडों के साथ सलाह-मशविरा करने के लिए एक माह के समय की मांग करते हुए सरकार के सामने सीज फायर का प्रस्ताव रखा था.