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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कोटवारों की नियुक्ति को लेकर कहा है…

नक्सलवाद की समाप्ति के बाद बस्तर अब विकास की तेज उड़ान के लिए तैयार : मंत्री रामविचार नेताम

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पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति : बंद खाते या आधार सीडिंग न होने से अटकी है छात्रवृत्ति तो 15 मार्च तक सुधरवाने का मौका

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रायपुर। भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा संचालित…

समुचित वित्तीय प्रबंधन के लिए हमारी सरकार दृढ़ संकल्पित : वित्त मंत्री ओपी चौधरी

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Shiv Mar 12, 2026 10 min read

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज वित्त मंत्री ओपी चौधरी के…

March 12, 2026

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छुरा नगर पंचायत में टेंडर गेम, खुदाई हो चुके स्थानों में बोर के लिए फिर से हुआ टेंडर, उठ रही जांच की मांग…

गरियाबंद। छुरा नगर पंचायत में शासन की पारदर्शी कार्यप्रणाली और क्रय नियमों की अनदेखी करते हुए एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था की सुचिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. पंचायत ने 17 अप्रैल को छह नलकूपों के खनन हेतु आठ लाख रुपए की लागत की निविदा जारी की, जिसकी अंतिम तिथि 8 मई रखी गई है. लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि जिन कार्यों के लिए टेंडर निकाला गया, वे पहले ही पूरे हो चुके हैं.

बता दें कि वार्ड क्रमांक 1, 4, 10 और 12 में स्थित स्थलों पर लगभग एक माह पहले ही नलकूप खुदवाए जा चुके हैं. इससे यह स्पष्ट होता है कि निविदा प्रक्रिया केवल कागजी खानापूर्ति बनकर रह गई है.

लेकिन राज्य शासन के क्रय नियम यह स्पष्ट करते हैं कि कोई भी कार्य, चाहे वह कितनी भी छोटी राशि का हो, निर्धारित प्रक्रिया और सार्वजनिक निविदा के माध्यम से ही किया जाना चाहिए. केवल आपातकालीन स्थितियों में ही सीधी क्रय प्रक्रिया को अनुमति दी जाती है, वह भी समुचित दस्तावेजी औचित्य और स्वीकृति के साथ.

इस मामले में न तो कार्य के पहले कोई वैध निविदा निकाली गई, न ही कोई आपात प्रस्ताव पारित किया गया. इसके बावजूद ठेकेदार द्वारा कार्य पूर्ण करवा लिया गया, जिससे यह संदेह गहरा हो गया है कि किसी खास एजेंसी को लाभ पहुंचाने के लिए यह सब सुनियोजित ढंग से किया गया.

इस मुद्दे पर जब नगर पंचायत के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) लालसिंह मरकाम से सवाल किया गया तो उन्होंने नगर में पानी की किल्लत का हवाला देते हुए इसे “अत्यावश्यक कार्य” बताया. लेकिन बड़ा सवाल यह है कि अगर कार्य वाकई आपातकालीन था, तो उसे तत्काल पीआईएसी प्रस्ताव के माध्यम से स्वीकृत कर भुगतान किया जा सकता था.

वहीं नगरवासियों ने इस पूरी प्रक्रिया को “टेंडर गेम” करार देते हुए सवाल उठाए हैं कि बिना टेंडर के एजेंसी का चयन आखिर कैसे हुआ. उन्होंने संदेह जताया कि यह किसी करीबी ठेकेदार को अनुचित लाभ पहुंचाने की साजिश हो सकती है. नगरवासियों ने जिलाधिकारी से मामले की गहन जांच कराने और दोषी अधिकारी के विरूद्ध कार्यवाही की मांग की है.