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परीक्षा परिणाम से उत्पन्न छात्रों के तनाव को दूर करने शिक्षकों को दिया प्रशिक्षण, एसीएस रेणु पिल्ले ने कहा- रिजल्ट से निराश न हो

रायपुर। विद्यार्थियों के अपेक्षित परिणाम नहीं आने से विद्यार्थी प्रायः तनाव में रहते हैं तथा कुछ विद्यार्थी तो डिप्रेशन में चले जाते हैं. राज्य शासन ने इस विषय को गंभीरता से लेते हुए माध्यमिक शिक्षा मंडल एवं SCERT के सहयोग से ऑनलाइन दक्षता विकास एवं अभिप्रेरणा प्रशिक्षण सोमवार को आयोजित किया.

परिणाम घोषित होने के पहले या बाद में निराश होने या तनाव लेने की आवश्यकता नहीं

प्रशिक्षण में अतिरिक्त संचालक जेपी रथ ने कहा कि सचिव सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी के मार्गदर्शन में यह नई शुरुआत की गई है परीक्षा के बाद बच्चे तनाव ग्रसित हो जाते हैं तथा गलत रास्ते पर चले जाते हैं अतः इस के लिए तनाव प्रबंधन करना अत्यंत आवश्यक है. रेनू पिल्ले(ACS) ने अपने कहा कि हम शीघ्र बोर्ड परीक्षा परिणाम घोषित करने जा रहे हैं. परीक्षा परिणाम घोषित होने के पहले या बाद में निराश होने या तनाव लेने की आवश्यकता नहीं है एवं पालकों को भी बच्चों से बहुत अधिक एक्सपेक्टेशन नहीं करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि यदि किसी भी बच्चे में यह प्रवृत्ति पाई जाती है या इस संदर्भ में कोई भी सूचना मिलती है तो स्वास्थ्य विभाग के टोल फ्री नंबर 104 आरोग्य सेवा निःशुल्क परामर्श पर सूचित किया जा सकता है. यह टोल फ्री नंबर 24×7 संचालित रहता है.सूचना प्राप्त होने पर विद्यार्थियों के हित में तत्काल समाधान उपलब्ध कराया जा सकेगा.

कम नंबर लाने का मतलब यह नहीं है कि नॉलेज कम

स्कूल शिक्षा सचिव सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने कहा कि कई बच्चे अपेक्षा अनुसार परिणाम नहीं ला पाते इस स्थिति में तनाव नहीं लेना चाहिए. कम नंबर लाने का मतलब यह नहीं है कि नॉलेज कम है, कई व्यक्तित्व ऐसे हैं, जो अपने बचपन में नंबर नहीं ला पाए पर आगे जाकर उन्होंने बहुत ख्याति प्राप्त की. खनिज विभाग संयुक्त सचिव सुनील जैन ने अनुभव और पूर्व में किए गए नवाचार स्वयंसेवी अभियान को नवजीवन के बारे में विस्तार से बताते हुए प्रत्येक ग्राम में एक जन सहयोग आधारित कार्यक्रम स्वयंसेवी की मदद लेने की प्रक्रिया और क्रियान्वयन के बारे में प्रशिक्षणार्थियों को मार्गदर्शन दिया.

बच्चों को हमेशा इनकरेज करना चाहिए

विषय विशेषज्ञ डॉ.स्वाति शर्मा ने कुछ ऐसे व्यक्तित्व का उदाहरण दिया, जिनके प्रारंभिक जीवन में चुनौतियां थी परंतु बाद में भी सफल हुए. उदाहरण के लिए बिल गेट्स,अल्बर्ट आइंस्टीन, थॉमस एडिसन. साथ ही उन्होंने कहा कि बच्चों को हमेशा इनकरेज करना चाहिए, फैमिली एनवायरमेंट हमेशा पॉजिटिव होना चाहिए. बच्चों को अन्य बच्चों के साथ कंपेयर नहीं करना चाहिए और हमेशा बच्चों के साथ क्वालिटी टाइम बिताना चाहिए.

बच्चों के लिए 5000 से अधिक करियर के ऑप्शन

मेडिकल कॉलेज रायपुर मनोरोग विशेषज्ञ डॉ.प्रीति सिंह ने बताया कि बहुत बार ऐसा देखा गया है कि बहुत अच्छे रिजल्ट लाने वाले बच्चों का परिणाम खराब हो जाता है तो ऐसे बच्चे अपने रिजल्ट को एक्सेप्ट नहीं कर पाते. ऐसे बच्चे तनाव ग्रसित हो जाते हैं कभी-कभी अपने बड़े भाई या बहनों के साथ कंपैरिजन करने पर भी वह अपने आप को कुंठित महसूस करते हैं.

कैरियर काउंसलर डॉ.वर्षा वरवंडकर ने बताया कि career councelling विद्यार्थियों के लिए अत्यंत आवश्यक है. उन्होंने बताया कि वर्तमान में बच्चों के लिए 5000 से अधिक करियर के ऑप्शन है तथा बच्चों में 21st सेंचुरी स्किल विकसित करने की अत्यंत आवश्यकता है. प्रीति शुक्ला एवं छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के जैन सर ने भी अपने विचार प्रकट किए.

राज्य में परीक्षा परिणाम से विद्यार्थियों में उत्पन्न विभिन्न अवसाद और अन्य जानलेवा समस्याओं से निजात पाने तथा उन्हें नियंत्रित करने,समाज, पालक, स्वयसेवियों, शिक्षकों के माध्यम से निगरानी प्रणाली विकसित करने यह दक्षता विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस ऑनलाइलन प्रशिक्षण कार्यक्रम से लगभग 30,000 से अधिक यानी बड़ी संख्या में सरकारी व निजी स्कूलों के 10-12वीं के कक्षा शिक्षक, पालक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता एवं बीईओ, बीआरसीसी, सीआरससी आदि ने स्वेच्छा से प्रशिक्षण प्राप्त किया. पूर्णतः स्वेच्छा पर आधारित इस अभियान के प्रशिक्षित व स्वयंसेवी सदस्य स्कूल शिक्षा विभाग तथा विशेष कर छग माध्यमिक शिक्षा मंडल की ओर से चिन्हांकित समाजशास्त्रियों, मनोवैज्ञानिक चिकित्सकों के माध्यम से 10-12 वीं परीक्षा परिणाम घोषित होने के पूर्व व पश्चात निरंतर अपना योगदान देंगे.