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March 9, 2026

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सूचना आयोग को हल्के में लेना डीएफओ को पड़ा भारी, सरकार ने अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए जारी किया नोटिस, जानिए पूरा मामला…

रायपुर।  सूचना आयोग को हल्के में लेना एक डीएफओ को भारी पड़ गया। कई आईएफएस अधिकारियों को पेनल्टी अधिरोपित होने के बावजूद अमूमन वन विभाग के जन सूचना अधिकारी सूचना आयोग को हल्के में ही लेते हैं। पेनल्टी लगने के बाद कई अधिकारियों ने कोर्ट से स्टे ले रखा है, परंतु भूल जाते हैं कि सूचना आयोग के पास दूसरी तलवार भी है। ऐसे ही एक प्रकरण में पंकज राजपूत तत्कालीन वनमंडल अधिकारी महासमुंद वर्तमान पदस्थापना खैरागढ़ वनमंडल के विरुद्ध सूचना आयोग के आदेश उपरांत वन विभाग छग शासन ने अखिल भारतीय सेवा (अनुशासन एव अपील) नियम 1969 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रारंभ करने नोटिस जारी कर 15 दिना में जवाब मांगा है।

जानिए क्या है पूरा मामला

दरअसल जनवरी 2020 में रायपुर के आवेदक नितिन सिंघवी ने महासमुंद वनमंडल से हाथी द्वारा जनहानि और धनहानि की जानकारी के दस्तावेज मांगे थे। तत्कालीन जन सूचना अधिकारी सह डीएफओ मयंक पाण्डेय ने जवाब दिया कि दस्तावेज विशालकाय है, आकर अवलोकन कर लें। अवलोकन के पश्चात चिन्हित दस्तावेज निशुल्क प्रदाय कर दिए जाएंगे। मामला सूचना आयोग पंहुचा (प्रकरण क्र.ए/3066/2020)। सुनवाई के दौरान 15 फरवरी 2021 को आयोग को जन सूचना अधिकारी ने बताया कि जानकारी 94928 पेज में हो सकती है। आयोग ने आदेशित किया कि आवेदक को दस्तावेज मांगे जाने पर अवलोकन के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। आवेदक द्वारा चाही गई जानकारी निशुल्क प्रेषित करें। प्रधान मुख्य वन संरक्षक को शासन पर निशुल्क सूचना देने वाले दस्तावेजों की लागत दोषी अधिकारी से वसूल कर शासन के कोष में जमा करने के आदेश भी दिए थे।

अगली सुनवाई में क्या हुआ

अगली सुनवाई तक 2020 में महासमुंद वन मण्डल में पदस्थ रहे डीएफओ मयंक पांडे का तबादला बालोद हो गया और नए डीएफओ पंकज राजपूत आए, जो अब खैरागढ़ वन मण्डल में पदस्थ हैं। उन्होंने आयोग को 28 अगस्त 2021 को निशुल्क सूचना प्रदाय करने के आयोग के आदेश के संबंध में बताया कि मत मांगे जाने उपरान्त महाधिवक्ता द्वारा आदेश के विरुद्ध उच्च न्यायालय बिलासपुर में अपील करने की अनुशंसा की है और कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। उन्होंने आयोग से 15 दिन का समय मांगा, जिस पर आयोग ने बिलासपुर हाईकोर्ट का स्थगन आदेश प्रस्तुत करने के आदेश दिए परंतु जन सूचना अधिकारी ने बाद की दो सुनवाई 17 सितंबर 2021 और 18 अप्रैल 2022 में भी स्थागन आदेश प्रस्तुत नहीं किया, जिस पर आयोग ने माना कि स्थगन आदेश प्रस्तुत न कर पाने के कारण प्रकरण अनावश्यक रूप से लंबित रहा और शासन से पंकज राजपूत के विरुद्ध 3 अगस्त 2022 को अनुशासनात्मक कार्यवाही की अनुशंसा की।

2022 के आदेश पर 2025 में कार्यवाही

आयोग के आदेश के बावजूद पंकज राजपूत के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं की जाने की जानकारी सूचना आयोग के समक्ष 2025 में लाने के बाद अवर सचिव सूचना आयोग ने शासन से सूचना आयोग के आदेश के पालन प्रतिवेदन की मांग की। इसके बाद वन एवं जलवायु विभाग ने 11 जुलाई 2025 को पंकज राजपूत वर्तमान पदस्थापना खैरागढ़ वनमंडल कर्तव्यों में लापरवाही बरतने के कारण शो-कॉज नोटिस जारी कर 15 दिवस में जवाब मांगा है। नोटिस में लिखा गया है कि आपके द्वारा अपने कर्तव्यों के निष्पादन में लापरवाही बरती गई, जो अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम 1968 के नियम 3 का उल्लंघन है। अतः कारण बताएं कि क्यों ना उक्त कृत के लिए आपके विरुद्ध अखिल भारतीय सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम 1969 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रारंभ की जाए।