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March 8, 2026

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UGC के ‘समानता विनियम 2026’ पर मुंगेली से उठा मजबूत समर्थन…ST, SC, OBC एकता महासंघ ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भेजा समर्थन पत्र

मुंगेली। उच्च शिक्षा में समानता और सामाजिक न्याय को लेकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा 13 जनवरी 2026 को अधिसूचित “उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने वाले विनियम, 2026” को मुंगेली जिले में व्यापक समर्थन मिला है। ST, SC, OBC एकता महासंघ, जिला मुंगेली ने इस संबंध में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री एवं यूजीसी चेयरमैन को समर्थन पत्र प्रेषित कर इन विनियमों का पूर्ण समर्थन व्यक्त किया है।

महासंघ ने अपने पत्र में कहा है कि ये विनियम देशभर के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में निष्पक्ष, सुरक्षित और समावेशी शैक्षणिक वातावरण स्थापित करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम हैं। लंबे समय से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, दिव्यांगजन एवं अन्य वंचित समुदायों के छात्रों को शैक्षणिक परिसरों में प्रत्यक्ष और परोक्ष भेदभाव का सामना करना पड़ता रहा है। ऐसे में यूजीसी द्वारा लाए गए ये नियम न केवल भेदभाव को स्पष्ट रूप से परिभाषित करते हैं, बल्कि उसके निवारण के लिए ठोस संस्थागत व्यवस्था भी सुनिश्चित करते हैं।

हर संस्थान में अनिवार्य होगा ‘समान अवसर केंद्र’

नए विनियमों के तहत प्रत्येक उच्च शिक्षा संस्थान में समान अवसर केंद्र (Equal Opportunity Centre – EOC) की स्थापना अनिवार्य की गई है। यह केंद्र वंचित वर्गों के छात्रों और कर्मचारियों को शैक्षणिक मार्गदर्शन, परामर्श, करियर सलाह, छात्रवृत्ति संबंधी जानकारी तथा उनके संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक करेगा। महासंघ का कहना है कि यह केंद्र उन छात्रों के लिए विशेष रूप से सहायक होगा, जो स्वयं को उपेक्षित या अलग-थलग महसूस करते हैं।

‘समानता समिति’ करेगी शिकायतों का निपटारा

विनियमों के अनुसार हर संस्थान में एक समानता समिति (Equity Committee) गठित की जाएगी, जो भेदभाव से जुड़ी शिकायतों की सुनवाई और समाधान के लिए जिम्मेदार होगी। समिति में SC, ST, OBC, दिव्यांगजन और महिला प्रतिनिधित्व अनिवार्य रहेगा, ताकि निर्णय प्रक्रिया में विविध समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके। शिकायतों का गोपनीय पंजीकरण और समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा।

24×7 हेल्पलाइन और निगरानी तंत्र

इन नियमों में 24×7 समानता हेल्पलाइन, मोबाइल ‘समानता दल’ (Equity Squads) और विभागीय स्तर पर ‘समानता दूत’ (Equity Ambassadors) जैसी व्यवस्थाएं भी शामिल हैं। इन माध्यमों से छात्रों और कर्मचारियों को त्वरित सहायता और शिकायत दर्ज कराने का अवसर मिलेगा। साथ ही, संस्थानों को अपनी समानता संबंधी गतिविधियों की नियमित रिपोर्ट यूजीसी को सौंपनी होगी। एक राष्ट्रीय निगरानी समिति इन नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा करेगी।

उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई

महासंघ ने विशेष रूप से इस बात का स्वागत किया है कि विनियमों का पालन न करने वाले संस्थानों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है। यूजीसी ऐसे संस्थानों की वित्तीय सहायता रोक सकता है, डिग्री प्रदान करने का अधिकार समाप्त कर सकता है या उनकी मान्यता रद्द कर सकता है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि ये नियम केवल कागज़ी न रहकर जमीनी स्तर पर लागू हों।

NEP 2020 की भावना के अनुरूप

महासंघ ने कहा कि ये विनियम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की भावना के अनुरूप हैं, जो शिक्षा में समावेशन, समान अवसर और सामाजिक न्याय पर जोर देती है। संगठन ने विश्वास जताया कि यदि इन नियमों का ईमानदारी से पालन किया गया तो उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता, सम्मान और गरिमा की नई संस्कृति विकसित होगी।अंत में ST, SC, OBC एकता महासंघ, जिला मुंगेली ने केंद्र सरकार और यूजीसी से अपील की है कि इन विनियमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्यों और विश्वविद्यालयों को स्पष्ट दिशा-निर्देश एवं संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, ताकि समाज के हर वर्ग के विद्यार्थियों को आगे बढ़ने का समान अवसर मिल सके।