Special Story

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर प्रदेशवासियों को दी शुभकामनाएं

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर प्रदेशवासियों को दी शुभकामनाएं

ShivFeb 28, 20252 min read

रायपुर।    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस…

51 करोड़ रुपए की लागत से बनेगा पथरिया बायपास : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

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ShivFeb 27, 20253 min read

भोपाल।  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री…

देश के दिल मध्यप्रदेश में पर्यटन के स्वर्ण युग का हुआ आरंभ : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

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ShivFeb 27, 20253 min read

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हिंदुस्तान…

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दंगवाड़ा में की बोरेश्वर महादेव की पूजा-अर्चना

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दंगवाड़ा में की बोरेश्वर महादेव की पूजा-अर्चना

ShivFeb 27, 20251 min read

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सपत्नीक चंबल नदी तट पर…

February 28, 2025

Apni Sarkaar

जो कहेंगे सच कहेंगे

पुण्यश्लोक देवी अहिल्याबाई होलकर के 300वें जयंती वर्ष पर माननीय सरकार्यवाह जी का वक्तव्य

रायपुर।   31 मई, 2024 से देवी अहिल्याबाई होलकर का 300 वाँ जयंती वर्ष प्रारंभ हो रहा है। उनका जीवन भारतीय इतिहास का एक स्वर्णिम पर्व है। ग्रामीण पृष्ठभूमि वाले सामान्य परिवार की बालिका से एक असाधारण शासनकर्ता तक की उनकी जीवनयात्रा आज भी प्रेरणा का महान स्रोत है। वे कर्तृत्व, सादगी, धर्म के प्रति समर्पण, प्रशासनिक कुशलता, दूरदृष्टि एवं उज्ज्वल चारित्र्य का अद्वितीय आदर्श थीं। ‘श्री शंकर आज्ञेवरुन’ (श्री शंकर जी की आज्ञानुसार) इस राजमुद्रा से चलने वाला उनका शासन हमेशा भगवान् शंकर के प्रतिनिधि के रूप में ही काम करता रहा। उनका लोक कल्याणकारी शासन भूमिहीन किसानों, भीलों जैसे जनजाति समूहों तथा विधवाओं के हितों की रक्षा करनेवाला एक आदर्श शासन था । समाजसुधार, कृषिसुधार, जल प्रबंधन, पर्यावरण रक्षा, जनकल्याण और शिक्षा के प्रति समर्पित होने के साथ साथ उनका शासन न्यायप्रिय भी था। समाज के सभी वर्गों का सम्मान, सुरक्षा, प्रगति के अवसर देने वाली समरसता की दृष्टि उनके प्रशासन का आधार रही। केवल अपने राज्य में ही नहीं, अपितु सम्पूर्ण देश के मंदिरों की पूजन-व्यवस्था और उनके आर्थिक प्रबंधन पर भी उन्होंने विशेष ध्यान दिया। बद्रीनाथ से रामेश्वरम तक और द्वारिका से लेकर पुरी तक आक्रमणकारियों द्वारा क्षतिग्रस्त मंदिरों का उन्होंने पुनर्निर्माण करवाया। प्राचीन काल से चलती आयी और आक्रमण काल में खंडित हुई तीर्थयात्राओं में उनके कामों से नवीन चेतना आयी। इन बृहद कार्यों के कारण उन्हें ‘पुण्यश्लोक’ की उपाधि मिली। संपूर्ण भारतवर्ष में फैले हुए इन पवित्र स्थानों का विकास वास्तव में उनकी राष्ट्रीय दृष्टि का परिचायक है।

पुण्यश्लोक देवी अहिल्याबाई की जयंती के 300 वें वर्ष के पावन अवसर पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए समस्त स्वयंसेवक एवं समाज बंधु-भगिनी इस पर्व पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में मनोयोग से सहभाग करें। उनके दिखाये गए सादगी, चारित्र्य, धर्मनिष्ठा और राष्ट्रीय स्वाभिमान के मार्ग पर अग्रसर होना ही उन्हें सच्ची श्रध्दांजली होगी।