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छत्तीसगढ़ में सौर ऊर्जा को बढ़ावा, साय कैबिनेट ने सौर ऊर्जा नीति 2017-2027 में किए महत्वपूर्ण संशोधन

रायपुर।  छत्तीसगढ़ में अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में विष्णु देव साय सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। 09 सितंबर 2025 को महानदी भवन, नया रायपुर में आयोजित कैबिनेट बैठक में सौर ऊर्जा नीति 2017-2027 में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। ऊर्जा विभाग द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव के अनुसार, अब राज्य में सौर ऊर्जा परियोजना विकासकर्ताओं को आवंटित परियोजनाओं को पूर्ण करने के लिए 36 माह का समय मिलेगा, जो पहले 24 माह था।

सरकार का यह निर्णय राज्य में अक्षय ऊर्जा निवेश को बढ़ावा देगा और निवेशकों को परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए अधिक समय उपलब्ध कराएगा। इस संशोधन से न केवल परियोजना विकासकर्ताओं को सुविधा होगी, बल्कि राज्य में सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है।

औद्योगिक प्रोत्साहन का लाभ

संशोधित नीति के तहत राज्य में स्थापित होने वाली सौर ऊर्जा परियोजनाएं अब औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के अंतर्गत कोर सेक्टर (स्टील को छोड़कर) उद्योगों के लिए घोषित औद्योगिक निवेश प्रोत्साहनों की पात्र होंगी। इसके अलावा, प्रत्येक सौर ऊर्जा परियोजना द्वारा संयंत्र की स्वयं की खपत (ऑक्ज़लरी खपत) और राज्य के भीतर की गई केप्टिव खपत पर विद्युत शुल्क के भुगतान से छूट दी जाएगी।

राष्ट्रीय लक्ष्य की प्राप्ति में योगदान

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2030 तक देश में 500 गीगावॉट अपरंपरागत ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है। साय कैबिनेट द्वारा किए गए इस संशोधन से छत्तीसगढ़ इस लक्ष्य की प्राप्ति में महत्वपूर्ण योगदान दे सकेगा। ऊर्जा विभाग का मानना है कि इन नीतिगत सुधारों से राज्य में बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित होगा और सौर ऊर्जा उत्पादन में तेजी आएगी।

क्रेडा ने जताया आभार

कैबिनेट के इस निर्णय पर छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (CREDA) के अध्यक्ष भूपेन्द्र सवन्नी एवं सी.ई.ओ. राजेश सिंह राणा ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह संशोधन छत्तीसगढ़ में सौर ऊर्जा परियोजनाओं को नई गति प्रदान करेगा और राज्य को अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी बनाने में मदद करेगा।

इस निर्णय से राज्य में हरित ऊर्जा उत्पादन के प्रयासों को मजबूती मिलेगी और पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा।