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Shiv Mar 8, 2026 1 min read

कवर्धा। जिले के पिपरिया थाना क्षेत्र के ग्राम बानो में चोरों…

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Shiv Mar 7, 2026 2 min read

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March 8, 2026

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विधायक के फर्जी जाति प्रमाण पत्र पर बोले सिंहदेव- फर्जी सर्टिफिकेट पर चुनाव लड़ने वाले का निर्वाचन रद्द हो

सूरजपुर/अंबिकापुर। प्रतापपुर विधानसभा क्षेत्र की विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते के जाति प्रमाण पत्र की वैधता पर विवाद गंभीर होता जा रहा है। आरोप है कि उन्होंने कथित रूप से फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर चुनाव लड़ा और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीट से जीत हासिल की। मामले में आदिवासी समाज लगातार कार्रवाई की मांग कर रहा है।

इस मुद्दे को लेकर पूर्व उप मुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव ने भी कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि “अगर कोई भी व्यक्ति फर्जी जाति के आधार पर चुनाव लड़ता है, फिर चाहे वह किसी भी पार्टी का हो, उसका निर्वाचन रद्द होना चाहिए।”

हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी कार्रवाई लंबित

आदिवासी समाज ने इस मामले को बिलासपुर हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसके बाद 17 जून 2025 को अदालत ने जिला स्तरीय और उच्च स्तरीय जाति छानबीन समितियों को जांच कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। लेकिन आरोप है कि चार माह गुजरने के बाद भी जाति प्रमाण पत्र निरस्त नहीं किया गया। इसके चलते समुदाय में नाराज़गी बढ़ गई है और प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करेंगे।

जिला स्तरीय समिति ने भेजे नोटिस, विधायक अनुपस्थित

जिला स्तरीय जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति की ओर से 28 अगस्त, 15 सितंबर और 29 सितंबर 2025 को नोटिस जारी किए गए थे। समिति ने विधायक शकुंतला पोर्ते को दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए बुलाया, लेकिन बताया जा रहा है कि वे सुनवाई में उपस्थित नहीं हुईं। समाज ने इसे जांच प्रक्रिया से बचने की कोशिश करार दिया है।

गोड़ समाज और आदिवासी समाज का आरोप

गोड़ समाज और आदिवासी संगठनों ने विधायक पर कूटरचित और गलत जानकारी के आधार पर जाति प्रमाण पत्र बनवाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि न तो विधायक और न ही उनके पति कोई मूल आदिवासी दस्तावेज प्रस्तुत कर पाए हैं। आरोप पत्र में दावा किया गया है कि उनके पिता के दस्तावेजों के आधार पर भी प्रमाण पत्र जारी नहीं हुआ, लेकिन फिर भी उन्हें ST वर्ग का प्रमाण पत्र दे दिया गया।

“आदिवासी अधिकारों का हनन”

आदिवासी समाज का कहना है कि यदि गैर-आदिवासी व्यक्ति गलत प्रमाण पत्र के आधार पर अनुसूचित जनजाति वर्ग की सीट से चुनाव जीतता है, तो यह असली आदिवासी उम्मीदवारों के अधिकारों का हनन है। समाज ने इसे राजनीतिक धोखाधड़ी करार दिया है और कहा है कि इससे पूरे आदिवासी समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं।