Special Story

तहसीलदार और नायब तहसीलदारों का हुआ तबादला, देखें लिस्ट…

तहसीलदार और नायब तहसीलदारों का हुआ तबादला, देखें लिस्ट…

Shiv Mar 9, 2026 2 min read

बिलासपुर। जिले में प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त करने के उद्देश्य से…

निर्विरोध राज्यसभा सांसद चुनी गईं लक्ष्मी वर्मा और फूलोदेवी नेताम, विधानसभा पहुंचकर लिया प्रमाण पत्र, समर्थकों ने दी बधाई

निर्विरोध राज्यसभा सांसद चुनी गईं लक्ष्मी वर्मा और फूलोदेवी नेताम, विधानसभा पहुंचकर लिया प्रमाण पत्र, समर्थकों ने दी बधाई

Shiv Mar 9, 2026 2 min read

रायपुर। छत्तीसगढ़ से भाजपा प्रत्याशी लक्ष्मी वर्मा और कांग्रेस प्रत्याशी फूलोदेवी…

अस्पताल परिसर में लगी भीषण आग, आधा दर्जन कंडम एंबुलेंस समेत अन्य वाहन जलकर खाक

अस्पताल परिसर में लगी भीषण आग, आधा दर्जन कंडम एंबुलेंस समेत अन्य वाहन जलकर खाक

Shiv Mar 9, 2026 1 min read

कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा स्थित जिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल परिसर में…

बिलासपुर में अवैध हुक्का बार पर पुलिस की दबिश, होटल मैनेजर गिरफ्तार

बिलासपुर में अवैध हुक्का बार पर पुलिस की दबिश, होटल मैनेजर गिरफ्तार

Shiv Mar 9, 2026 2 min read

बिलासपुर। जिले में अवैध रूप से संचालित हुक्का बार पर…

March 9, 2026

Apni Sarkaar

जो कहेंगे सच कहेंगे

जैव चिकित्सा अपशिष्ट का वैज्ञानिक प्रबंधन हमारी सामूहिक जिम्मेदारी: आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी

रायपुर। छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मण्डल द्वारा जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 (संशोधित 2021) के प्रभावी अनुपालन और जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला का सफल आयोजन आज नवा रायपुर में हुआ। कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित वित्त, वाणिज्य कर, आवास एवं पर्यावरण तथा योजना एवं सांख्यिकी मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि जैव चिकित्सा अपशिष्ट का उचित प्रबंधन केवल स्वास्थ्य संस्थानों की नहीं बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि जैव चिकित्सा अपशिष्ट का वैज्ञानिक एवं सुरक्षित निपटान सार्वजनिक स्वास्थ्य से सीधे जुड़ा विषय है, इसलिए नियमों का कड़ाई से पालन अत्यंत आवश्यक है। श्री चौधरी ने स्वास्थ्य संस्थानों से अपील की कि वे नियमों को स्पष्ट रूप से समझकर उनका शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला इसी उद्देश्य से आयोजित की गई है ताकि सभी संस्थान नियमों को बेहतर समझ सकें, अपनी समस्याएं निसंकोच साझा कर सकें और समाधान पर सामूहिक रूप से कार्य किया जा सके। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आपसी संवाद, सहभागिता और सहयोग से छत्तीसगढ़ राज्य जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन में एक आदर्श राज्य के रूप में उभरेगा।

आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव एवं मण्डल के अध्यक्ष अंकित आनंद ने कहा कि जैव चिकित्सा अपशिष्ट के कुशल प्रबंधन के लिए स्वास्थ्य संस्थानों की सक्रिय भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। जब तक नियमों को सही रूप में नहीं समझा जाएगा, उनका प्रभावी कार्यान्वयन संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि मण्डल की यह कार्यशाला इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है, जहां सभी संबंधित हितधारकों को विस्तृत जानकारी और प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।

कार्यशाला के आरंभ में मण्डल के सदस्य सचिव श्री राजू अगसिमनि ने बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य स्वास्थ्य संस्थानों में जैव चिकित्सा अपशिष्ट के वैज्ञानिक निपटान, सुरक्षित परिवहन, पृथक्करण, भंडारण और उपचार की प्रक्रियाओं को मजबूत बनाना है।

कार्यक्रम के दौरान केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के वरिष्ठ वैज्ञानिक अनुप चतुर्वेदी तथा यादवेन्द्र यादव, अधिवक्ता (सीपीसीबी, भोपाल) ने जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन के विभिन्न तकनीकी और कानूनी पहलुओं पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया।

इस राज्य स्तरीय कार्यशाला में मण्डल के वरिष्ठ अधिकारियों सहित प्रमुख अस्पतालों, नर्सिंग होम, पैथोलॉजी लैब, डायग्नोस्टिक सेंटर्स, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, नर्सिंग होम एसोसिएशन, चिकित्सा प्रकोष्ठ तथा विभिन्न स्थानीय निकायों के स्वास्थ्य अधिकारियों ने सहभागिता की।

इस अवसर पर जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन पर आधारित एक मार्गदर्शिका पुस्तिका का विमोचन भी किया गया।