Special Story

अतिक्रमण पर चला प्रशासन का बुलडोजर, हाईकोर्ट के आदेश पर हटाए गए 26 अवैध कब्जे

अतिक्रमण पर चला प्रशासन का बुलडोजर, हाईकोर्ट के आदेश पर हटाए गए 26 अवैध कब्जे

ShivApr 5, 20251 min read

बिलासपुर।  हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका के पालन में जिला…

ACB की बड़ी कार्रवाई, रिश्वत लेते ASI रंगे हाथ गिरफ्तार

ACB की बड़ी कार्रवाई, रिश्वत लेते ASI रंगे हाथ गिरफ्तार

ShivApr 5, 20251 min read

कोरबा। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) बिलासपुर की टीम ने बड़ी कार्रवाई…

बस्तर अब बंदूक नहीं, विकास की आवाज से जाना जायेगा – केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह

बस्तर अब बंदूक नहीं, विकास की आवाज से जाना जायेगा – केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह

ShivApr 5, 20256 min read

रायपुर।    केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने…

April 5, 2025

Apni Sarkaar

जो कहेंगे सच कहेंगे

नाबालिग साली के साथ दुष्कर्म, हाईकोर्ट ने आरोपी जीजा को सुनाई 20 साल की सजा

बिलासपुर।  हाईकोर्ट ने 13 साल की नाबालिग साली के साथ दुष्कर्म करने वाले जीजा को 20 साल कैद की सजा सुनाई है। मेडिकल रिपोर्ट में रेप की पुष्टि न होने के बावजूद पीड़िता और गवाहों के बयान के आधार पर यह सजा सुनाई गई है। मामला 2023 का खैरागढ़ का है। मामले में सुनवाई चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच में हुई।

बता दें कि घटना के दिन पीड़िता घर के बाहर अपने भाई के साथ खेल रही थी। तभी पड़ोस में रहने वाला (पीड़िता के मौसी का दामाद) उसे बहला फुसला कर अपने घर लेकर चला गया, जहां पीड़िता के साथ दुष्कर्म किया। पूरी रात खोजने के बाद पीड़िता अपने मां, पापा को आरोपी के घर से बरामद हुई। उसने बताया कि आरोपी ने उसके साथ गलत हरकत की है। इस बात की जानकारी लगते ही पीड़िता के मां-बाप ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई।

पीड़िता ने पुलिस वालों को अपने बयान में बताया कि उसके साथ दो बार दुष्कर्म हुआ। पुलिस ने मामले में आरोपी के खिलाफ पॉक्सो के तहत अपराध दर्ज किया। हालांकि मेडिकल जांच में दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई। मामले में सुनवाई के बाद पीड़िता और गवाहों के बयान के आधार पर निचली अदालत ने आरोपी को जीवित रहते तक कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके खिलाफ आरोपी ने हाइकोर्ट में अपील की। मामले की सुनवाई के दौरान हाइकोर्ट ने माना कि दुष्कर्म के मामले में 16 साल से कम आयु की पीड़िता का बयान ही अपने आप में सबूत है। हालांकि निचली अदालत के फैसले को संशोधित करते हुए हाइकोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा को घटाकर 20 साल की कैद में बदल दिया।