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जाति जनगणना के फैसले पर राहुल गांधी का सरकार को समर्थन, साथ में रखीं ये 4 प्रमुख मांगें

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने बुधवार, 30 अप्रैल 2025 को देश में जातिगत जनगणना कराने का ऐलान किया है. केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट बैठक के बाद यह जानकारी दी कि अगली जनगणना के साथ ही जातीय आधार पर गणना भी की जाएगी. केंद्र के इस ऐतिहासिक निर्णय के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार के कदम का स्वागत किया, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने चार प्रमुख मांगें भी रखीं.

राहुल गांधी ने कहा, “हमने संसद में स्पष्ट किया था कि जातिगत जनगणना कराई जाएगी और 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा को खत्म किया जाएगा. अब जब सरकार ने यह फैसला लिया है, तो हम इसका समर्थन करते हैं. लेकिन हमें यह भी जानना जरूरी है कि यह जनगणना कब कराई जाएगी.”

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस कथन का हवाला देते हुए कहा कि देश में सिर्फ चार जातियां ( गरीब, मध्यम वर्ग, अमीर और बहुत अमीर) हैं. राहुल ने कहा, “इन चार वर्गों के भीतर वास्तविक स्थिति को समझने के लिए जातिगत आंकड़े जरूरी हैं. जाति जनगणना पहला कदम है, लेकिन इससे आगे भी बढ़ना होगा.”

राहुल गांधी की चार प्रमुख मांगें

जनगणना की स्पष्ट टाइमलाइन घोषित हो: राहुल गांधी ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह यह स्पष्ट करे कि जातिगत जनगणना कब और किस प्रक्रिया से कराई जाएगी.

तेलंगाना मॉडल को अपनाने की सलाह: उन्होंने सुझाव दिया कि केंद्र सरकार को तेलंगाना सरकार की तरह तेज़, पारदर्शी और समावेशी जाति सर्वेक्षण मॉडल अपनाना चाहिए.

50% आरक्षण सीमा हटाने की मांग: राहुल गांधी ने एक बार फिर से 50 फीसदी आरक्षण की संवैधानिक सीमा हटाने की वकालत की. उन्होंने कहा कि जातिगत आंकड़ों के आधार पर न्यायसंगत हिस्सेदारी सुनिश्चित करना जरूरी है.

निजी शिक्षण संस्थानों में आरक्षण लागू हो: उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय केवल सरकारी नौकरियों तक सीमित नहीं होना चाहिए. निजी शिक्षण संस्थानों और निजी क्षेत्र में भी आरक्षण की व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि समान अवसर मिल सकें.

सरकार को सहयोग का प्रस्ताव

राहुल गांधी ने यह भी कहा कि कांग्रेस पार्टी इस जनगणना की रूपरेखा तैयार करने में सरकार को पूरा सहयोग देने को तैयार है. उन्होंने कहा, “यह हमारा विजन था और हम इसे समर्थन देते हैं. हमने सरकार पर लगातार दबाव बनाया, जिससे यह फैसला संभव हो सका. 11 साल बाद केंद्र सरकार ने जातिगत जनगणना की घोषणा की है. यह सामाजिक न्याय की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है.” उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं और सामाजिक न्याय के लिए काम करने वाले लोगों को भी बधाई दी और कहा कि इस लड़ाई में सभी की भूमिका सराहनीय रही है.