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Shiv Mar 9, 2026 2 min read

बिलासपुर। जिले में प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त करने के उद्देश्य से…

निर्विरोध राज्यसभा सांसद चुनी गईं लक्ष्मी वर्मा और फूलोदेवी नेताम, विधानसभा पहुंचकर लिया प्रमाण पत्र, समर्थकों ने दी बधाई

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रायपुर। छत्तीसगढ़ से भाजपा प्रत्याशी लक्ष्मी वर्मा और कांग्रेस प्रत्याशी फूलोदेवी…

अस्पताल परिसर में लगी भीषण आग, आधा दर्जन कंडम एंबुलेंस समेत अन्य वाहन जलकर खाक

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Shiv Mar 9, 2026 1 min read

कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा स्थित जिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल परिसर में…

बिलासपुर में अवैध हुक्का बार पर पुलिस की दबिश, होटल मैनेजर गिरफ्तार

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Shiv Mar 9, 2026 2 min read

बिलासपुर। जिले में अवैध रूप से संचालित हुक्का बार पर…

March 9, 2026

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आरंग-घूमराभाठा सड़क की गुणवत्ता पर सवाल, आंखों में धूल झोंककर किया जा रहा है करोड़ों की लागत से काम…

आरंग। प्रदेश में लोक निर्माण विभाग (PWD) इन दिनों कार्य की गुणवत्ता को लेकर लगातार विवादों के घेरे में हैं. ताजा मामला आरंग ब्लॉक का है, जहां 6.32 करोड़ रुपए की लागत से बन रही आरंग-घूमराभाठा सड़क के निर्माण में गंभीर अनियमितता का आरोप लग रहा है.

जानकारों का कहना है कि यह सड़क बनने के साथ ही उखड़ने की कगार पर पहुँच सकती है. सड़क निर्माण के तकनीकी नियमों को ताक पर रखकर ठेकेदार बिना पुरानी सड़क को उखाड़े उसी के ऊपर मुरूम डालकर बेस तैयार कर रहा है. विशेषज्ञों की मानें तो पुरानी डामर वाली सतह को बिना ‘स्कारिफाई’ (उखाड़े) किए नया बेस तैयार करने से सड़क की पकड़ मजबूत नहीं होती और पहली बारिश में ही सड़क धंसने का खतरा रहता है.

यही नहीं निर्माण स्थल पर उपयोग की जा रही मुरूम की गुणवत्ता इतनी खराब है कि ग्रामीण इसे ‘धूल और मिट्टी का मेल’ बता रहे हैं. इतना ही नहीं, कार्य योजना के अनुसार मार्ग में 10 नई पुलिया का निर्माण होना है, लेकिन आरोप है कि ठेकेदार पुरानी पुलियाओं को ही लीपा-पोती कर नया रूप देने की कोशिश कर रहा है, जो भविष्य में किसी बड़े हादसे को निमंत्रण दे सकता है.

सड़क चौड़ीकरण के नाम पर नहर से किसानों के खेतों तक जाने वाली आपासी नालियों (Irrigation Channels) को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया गया है. इससे किसानों के सामने सिंचाई का संकट खड़ा हो सकता है, लेकिन विभाग इस ओर आंखें मूंदे बैठा है.

जिम्मेदार अधिकारी मौन, फोन उठाने से बच रहे

जब इस संबंध में विभाग के अधिकारियों से उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो अनुविभागीय अधिकारी (SDO) सत्येंद्र साहू और उप अभियंता टीआर साहू ने फोन उठाना भी मुनासिब नहीं समझा. अधिकारियों की यह चुप्पी से सवाल उठ रहा है कि क्या अधिकारियों के संरक्षण में ही गुणवत्ता से समझौता हो रहा है? क्या 6.32 करोड़ की राशि केवल कागजों और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएगी?