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श्री सीमेंट परियोजना की जनसुनवाई स्थगित, भारी विरोध के बाद प्रशासन ने जारी किया आदेश

खैरागढ़। जिले के सण्डी, पण्डरिया, बुंदेली, विचारपुर और छुईंखदान क्षेत्र में प्रस्तावित श्री सीमेंट लिमिटेड की सण्डी लाइमस्टोन ब्लॉक खनन परियोजना को लेकर होने वाली जनसुनवाई को जिला प्रशासन ने आगामी आदेश तक स्थगित कर दिया है। यह सुनवाई 11 दिसंबर को बुंदेली स्थित सरस्वती शिशु मंदिर के पीछे मैदान में दोपहर 12 बजे से आयोजित की जानी थी। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी ने जारी आदेश में कहा है कि अपरिहार्य कारणों के चलते सुनवाई फिलहाल नहीं होगी। नई तिथि बाद में घोषित की जाएगी। बता दें कि 40 गांव के किसान लगातार इस प्रस्तावित परियोजना का विरोध कर रहे, जिसके चलते प्रशासन ने यह फैसला लिया है।

परियोजना प्रस्ताव के अनुसार, कुल 404 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रतिवर्ष 3.64 मिलियन टन चूना पत्थर, 5.128 मिलियन टन अपशिष्ट, 0.0409 मिलियन टन टॉप सॉइल और 0.182 मिलियन टन आरओएम रिजेक्ट्स के उत्खनन की योजना है। साथ ही 1200 TPH की प्राइमरी क्रशर और 400 TPH की सेकेंडरी क्रशर लगाने का प्रस्ताव भी शामिल है। जनसुनवाई की अध्यक्षता अपर कलेक्टर सुरेन्द्र कुमार ठाकुर द्वारा की जानी थी।

40 से ज्यादा गांव के किसान कर रहे विरोध

जनसुनवाई स्थगित होने का यह निर्णय उस समय लिया गया है, जब पिछले कुछ दिनों से छुईखदान–सण्डी क्षेत्र में परियोजना को लेकर माहौल लगातार गर्म है। 40 से ज्यादा गांवों के किसान इस खनन परियोजना के विरोध में आंदोलन कर रहे हैं। उनका कहना है कि खेती योग्य जमीन, पेयजल स्रोत और पर्यावरण पर इस प्रोजेक्ट का भारी असर पड़ेगा। पिछले सप्ताह शांतिपूर्ण रैली के दौरान छुईखदान एसडीएम कार्यालय के बाहर अचानक तनाव बढ़ गया था। भीड़ में घुसे कुछ उपद्रवियों ने बैरिकेड तोड़ दिया था, जिससे स्थिति बिगड़ी और पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा था। इस घटना के बाद से क्षेत्र में आंदोलन और प्रशासन की सतर्कता दोनों बढ़ गई है।

किसानों ने स्थगित जनसुनवाई को बताया आंशिक जीत

किसान नेताओं का आरोप है कि उनकी उपजाऊ जमीन और गांवों के भविष्य पर खतरे के बावजूद कंपनी गुमराह करने वाली जानकारी फैला रही है। वहीं श्री सीमेंट कंपनी का कहना है कि कुछ लोग विरोध भड़काने की कोशिश कर रहे हैं और परियोजना से होने वाले विकास, रोजगार और सुविधाओं की बात ग्रामीणों तक सही तरीके से नहीं पहुंच रही। कलेक्टर ने भी प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा था कि संवाद और जनसुनवाई ही समाधान का मंच है, जहां ग्रामीण खुले तौर पर अपनी आपत्तियां रख सकते हैं, लेकिन अब जब जनसुनवाई स्थगित कर दी गई है, किसानों ने इसे अपनी “आंशिक जीत” बताया है। हालांकि वे यह भी कहते हैं कि लड़ाई खत्म नहीं हुई है। उनका कहना है कि स्थगन सिर्फ पहला कदम है। परियोजना पूरी तरह वापस लिए जाने तक विरोध जारी रहेगा। दूसरी ओर कंपनी और प्रशासन नई तिथि घोषित होने तक स्थिति शांत रखने की कोशिश में है।

जनसुनवाई स्थगित होने से कम हुआ तनाव

परियोजना को लेकर खनन, पर्यावरण, खेती और विकास की इस बहस में अब अगला कदम प्रशासन की ओर से घोषित होने वाली नई तिथि तय करेगी। फिलहाल जनसुनवाई स्थगित होने के बाद क्षेत्र में तनाव थोड़ा कम जरूर हुआ है, लेकिन विवाद अभी भी जस का तस खड़ा है।